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उत्तर प्रदेश

नारद मोह और रावण जन्म की लीला ने मोहा दर्शकों का मन

नारद मोह और रावण जन्म की लीला ने मोहा दर्शकों का मन

श्रीराम चरित्र प्रदर्शन उत्सव के दूसरे दिन कलाकारों ने नारद मोह, रावण जन्म और वेदवती संवाद का किया मंचन

बुलंद संदेश ब्यूरो:जावेद अब्बासी 

सरधना। श्रीराम चरित्र प्रदर्शन उत्सव के दूसरे दिन रामा मंडल के कलाकारों ने नारद मोह, रावण जन्म और वेदवती संवाद की लीला का मंचन किया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को देर तक बांधे रखा।

लीला में दिखाया गया कि नारद मुनि अपने तप के बल पर कामदेव पर विजय प्राप्त कर लेते हैं। इसके बाद उन्हें अपनी तपस्या पर अहंकार हो जाता है। नारद के अहंकार को दूर करने के लिए भगवान विष्णु विश्वमोहिनी का स्वयंवर रचाते हैं। स्वयंवर में विश्वमोहिनी नारद मुनि के स्थान पर भगवान विष्णु को वरमाला पहनाती हैं। इससे नारद मुनि क्रोधित हो जाते हैं और भगवान विष्णु को श्राप दे देते हैं।

इसके बाद रावण के जन्म की लीला का मंचन किया गया। रावण और वेदवती के बीच संवाद का भी कलाकारों ने प्रभावी मंचन किया। लीला के दौरान वेदवती रावण को श्राप देती हैं। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से प्रसंगों को जीवंत कर दिया।कार्यक्रम में रामलीला कमेटी के प्रधान मलखान सैनी, संयोजक शरद त्यागी, प्रदीप मित्तल, मूलचंद सैनी, वीरेंद्र सैनी, अजय त्यागी, अभिषेक, मुनेश पंडित, सूर्यदेव त्यागी, डॉ. सुंदर, कुशलपाल राणा, प्रफुल्ल त्यागी, प्रदीप बुद्धि राजा, नवीन बंसल, हिमांशु आदि मौजूद रहे।