मंथरा के बहकावे में आईं कैकेयी, भरत के राज्याभिषेक की मांग पर राजा दशरथ हुए व्याकुल
बुलंद संदेश ब्यूरो:जावेद अब्बासी
सरधना। श्रीराम चरित्र प्रदर्शन उत्सव के तहत रविवार को रामलीला में कैकेयी के दो वरदान और भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का मंचन किया गया। लीला में दिखाया गया कि भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह के बाद अयोध्या में श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इसकी जानकारी मिलने पर मंथरा कैकेयी को भरत के भविष्य को लेकर बहकाती है।
मंथरा की बातों में आकर माता कैकेयी कोप भवन में चली जाती हैं। राजा दशरथ जब उन्हें मनाने पहुंचते हैं तो कैकेयी उनसे पूर्व में दिए गए दो वरदान मांगती हैं। पहले वरदान में वह भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और दूसरे वरदान में भगवान श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगती हैं।
कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ व्याकुल हो जाते हैं। एक ओर उन्हें अपने वचन का पालन करना था, तो दूसरी ओर पुत्र श्रीराम से बिछड़ने का दुख सता रहा था। इस प्रसंग के मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
रामलीला कमेटी के प्रधान मलखान सैनी, संयोजक शरद त्यागी, प्रदीप मित्तल, मूलचंद सैनी, वीरेंद्र सैनी, अजय त्यागी, अभिषेक, मुनेश पंडित, सूर्यदेव त्यागी, ललित सैनी, सुमित कुमार, अभिनव मित्तल, रक्षित गर्ग, प्रदीप बुद्धि राजा, नवीन बंसल और हिमांशु सहित अन्य लोग मौजूद रहे।


