दशलक्षण महापर्व के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र देव की पूजा-अर्चना कर लिया सरलता का संकल्प
बुलंद संदेश ब्यूरो:जावेद अब्बासी
सरधना। दशलक्षण महापर्व के अवसर पर दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में गुरुवार को उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा-अर्चना श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ हुई। सुबह से ही मंदिर में जैन समाज के श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र देव की पूजा-अर्चना कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने उत्तम आर्जव धर्म के महत्व को समझा। जैन धर्म के अनुसार उत्तम आर्जव मनुष्य को छल, कपट और कुटिलता का त्याग कर मन, वचन और कर्म में सरलता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के दौरान आत्मचिंतन करते हुए जीवन में सरलता, निष्कपटता और सच्चाई अपनाने का संकल्प लिया। इस दौरान मंदिर परिसर धार्मिक जयघोष और भक्तिमय वातावरण से गूंजता रहा।
समाज के लोगों ने कहा कि दशलक्षण महापर्व आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का पर्व है। इसके माध्यम से मनुष्य अपने जीवन की कमियों को दूर कर सद्गुणों को अपनाने का प्रयास करता है।
इस अवसर पर जैन समाज के श्रद्धालु, मंदिर समिति के पदाधिकारी और समाज के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
मन, वचन और कर्म में सरलता ही उत्तम आर्जव धर्म का संदेश है।


