*शिक्षक दिवस विशेष*
*सरकारी विद्यालय को नई पहचान देने का प्रयास*
बुलन्द संदेश ब्यूरो
*प्रस्तुति: दीपक सोलंकी*
शिक्षा को सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और मिशन मानकर कार्य करने वाले राकेश कुमार विश्वकर्मा रामपुर जनपद के बेसिक शिक्षा विभाग में एक ऐसे शिक्षक के रूप में अपनी पहचान बना रहे हैं, जिन्होंने नवाचार, तकनीक, खेल और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से सरकारी विद्यालयों को नई दिशा और दशा देने का प्रयास किया है।
शिक्षक के रूप में इन्होंने अपनी जीवन यात्रा प्राथमिक विद्यालय शहपुरा से प्रारंभ की। बाद में कम्पोजिट विद्यालय सनैया जट्ट में आई सी टी आधारित शिक्षा, और खेलकूद जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया। सामुदायिक सहयोग से विद्यालय में आवश्यक संसाधन जुटाने से लेकर विद्यार्थियों को राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया।
वर्तमान में मॉडल प्राइमरी स्कूल पट्टी कल्याणपुर में कार्यरत रहते हुए इन्होंने विद्यालय के शैक्षिक एवं भौतिक वातावरण को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया है। लाइब्रेरी, सीसीटीवी, गार्डन, आकर्षक वॉल पेंटिंग, सामान्य ज्ञान की दीवार और हरित विद्यालय परिसर जैसी पहल के साथ विद्यालय में बच्चों के लिए सीखने का बेहतर वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रहे हैं। वर्तमान में इनके विद्यालय के नामांकन में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले कई बच्चों ने सरकारी विद्यालय में प्रवेश लिया है।
खेलों के क्षेत्र में भी विद्यालय के विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया तथा कई खिलाड़ियों का चयन खेलो इंडिया कैंप तक हो चुका है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण, सीड्स बॉल अभियान, वृक्षारोपण, डिजिटल शिक्षा और जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा जैसे सामाजिक सरोकारों को भी इन्होंने अपनी कार्यशैली का हिस्सा बनाया।
अपने कार्यों के लिए उन्हें विभिन्न अवसरों पर विशिष्ट शिक्षक सम्मान, रामपुर रत्न, राष्ट्रीय नवाचार शिक्षक सम्मान सहित विभागीय एवं प्रशासनिक स्तर पर सम्मान और प्रशस्ति पत्र प्राप्त हो चुके हैं। आठ वर्षों की सेवा में चार बार विभाग द्वारा शिक्षण कार्य के लिए विशिष्ट शिक्षक सम्मान मिलना उनके प्रयासों की निरंतरता को दर्शाता है।
राकेश कुमार विश्वकर्मा का मानना है कि “शिक्षक का सबसे बड़ा पुरस्कार उसके विद्यार्थियों का उज्ज्वल भविष्य, बच्चों का प्यार और अभिभावकों का विश्वास है। जब किसी प्राइवेट स्कूल का बच्चा सरकारी विद्यालय में पढ़ने के लिए आता है, तो यह भी शिक्षक के लिए किसी बड़े पुरस्कार से कम नहीं होता।”
उनका प्रयास सिर्फ एक विद्यालय को बेहतर बनाने तक सीमित नहीं, बल्कि यह विश्वास पैदा करने का है कि सरकारी विद्यालय भी आधुनिक शिक्षा, बेहतर वातावरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण के माध्यम से बच्चों के सपनों को नई उड़ान दे सकते हैं।


