संभल में मशहूर शायर बशीर बद्र के इंतक़ाल पर शोक सभा आयोजित
बुलन्द संदेश/ लायबा नूर
संभल। अदब की दुनिया के मशहूर शायर बशीर बद्र के इंतक़ाल पर नगर में गहरा शोक व्यक्त किया गया। इस अवसर पर बज़्म-ए-सुख़न वराँ संभल के तत्वावधान में एक शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के साहित्यप्रेमियों, शिक्षकों, समाजसेवियों और उर्दू अदब से जुड़े लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। सभा में शायर-ए-अदब बशीर बद्र की शायरी, व्यक्तित्व और उर्दू साहित्य में उनके योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में रफ़ीक़ राही ने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी ग़ज़लों के माध्यम से इंसानी जज़्बात को जिस खूबसूरती से पेश किया, वह हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी शायरी आने वाली नस्लों के लिए भी रहनुमाई का काम करेगी।
फ़ईम साकिब ने अपने विचार रखते हुए कहा कि बशीर बद्र सिर्फ़ एक शायर नहीं बल्कि उर्दू अदब की पहचान थे। उनकी शायरी में मोहब्बत, दर्द, तहज़ीब और इंसानियत की खुशबू महसूस होती है।
मुदस्सिर हुसैन एडवोकेट ने कहा कि बशीर बद्र ने अपनी रचनाओं से समाज को जोड़ने और मोहब्बत का पैग़ाम देने का काम किया। उनका इंतक़ाल उर्दू साहित्य की अपूरणीय क्षति है।
डॉ. अज़ीज़ उल्लाह ख़ान ने कहा कि बशीर बद्र की शायरी दिलों को छू लेने वाली थी। उनकी ग़ज़लों में जिंदगी की सच्चाइयाँ बेहद आसान और असरदार अंदाज़ में मिलती हैं।
मास्टर वसीम अख्तर ने कहा कि बशीर बद्र जैसे शायर सदियों में पैदा होते हैं। उनकी ग़ज़लें आज भी युवाओं और बुज़ुर्गों के दिलों पर राज करती हैं और आगे भी करती रहेंगी।
सैयद शुजात हुसैन ने कहा कि बशीर बद्र की अदबी सेवाओं को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने उर्दू भाषा को आम लोगों के दिलों तक पहुँचाने का काम किया।
बद्र जहां खुर्शीद ने कहा कि बशीर बद्र का नाम रहती दुनिया तक ज़िंदा रहेगा और उनकी ग़ज़ले हमारे दिलो में हमेशा ताज़ा रहेंगी |
इसके अलावा सुहैल अनवर, अनस माजिद, मोहम्मद ज़ाहिद, मोहम्मद रफ़ी, मोहम्मद मुमताज़ आलम सहित अनेक लोगों ने भी शोक व्यक्त करते हुए मरहूम शायर को श्रद्धांजलि दी।
सभा के अंत में बशीर बद्र की मग़फ़िरत और उर्दू अदब की तरक़्क़ी के लिए दुआ की गई।
शोक सभा की अध्यक्षता उस्ताद शायर रफीक राही और संचालन मास्टर वसीम अख्तर सम्भली ने किया |


