संभल में ‘बकरा ट्रांसपोर्ट’ का खेल! डबल डेकर बसों में यात्रियों से ज्यादा बकरे, सिस्टम पर उठे सवाल
संभल/बहजोई। ईद से पहले संभल जनपद से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसने परिवहन विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। डग्गामार डबल डेकर बसों में यात्रियों के साथ बड़ी संख्या में बकरों की सप्लाई खुलेआम की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि ये बसें बिना परमिट सड़कों पर दौड़ रही हैं और जिम्मेदार अधिकारी तमाशबीन बने हुए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, संभल, बहजोई और चंदौसी से होकर दिल्ली-गाजियाबाद बॉर्डर तक जाने वाली कई डबल डेकर बसों में रोजाना बकरों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है। पहले बकरों को मालवाहक वाहनों से भेजा जाता था, लेकिन चेकिंग और कागज़ी कार्रवाई सख्त होने के बाद अब तस्करों ने नया तरीका अपना लिया है।
बताया जा रहा है कि जिन बसों में मुश्किल से 15 से 20 यात्री बैठे मिलते हैं, उन्हीं में 50 से 70 तक बकरे भर दिए जाते हैं। रविवार को इस्लामनगर की ओर से आ रही एक संदिग्ध डबल डेकर बस को रोका गया तो अंदर का नजारा देखकर लोग दंग रह गए। पूरी बस बकरों से भरी हुई थी।
यातायात पुलिस के टीएसआई ने बस का चालान तो किया, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब रोजाना करीब दो दर्जन ऐसी बसें जिले से गुजरती हैं, तो कार्रवाई सिर्फ एक बस पर ही क्यों हुई?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना परमिट चल रही ये बसें तेज रफ्तार में सड़कों पर दौड़ती हैं, जिससे हादसों का खतरा लगातार बना रहता है। इसके बावजूद परिवहन विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
जब इस मामले में सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं है और कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उनका यह बयान भी चर्चा में आ गया कि “चालान ही कर सकते हैं, इतने बकरे रखेंगे कहां?”
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सवारी बसें पशु परिवहन का नया जरिया बन चुकी हैं? क्या बिना परमिट चल रही इन बसों पर प्रशासन कोई बड़ी कार्रवाई करेगा, या फिर यूं ही चलता रहेगा ‘बकरा ट्रांसपोर्ट’ का यह खेल?
बुलन्द संदेश/ दिनेश सक्सेना


