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मुहर्रम पर अज़ाद नगर कॉलोनी से अलम-ए-मुबारक का जुलूस बरामद, मजलिस में कर्बला के पैग़ाम पर डाली गई रौशनी

मुहर्रम पर अज़ाद नगर कॉलोनी से अलम-ए-मुबारक का जुलूस बरामद, मजलिस में कर्बला के पैग़ाम पर डाली गई रौशनी

मुहर्रम पर अज़ाद नगर कॉलोनी से अलम-ए-मुबारक का जुलूस बरामद, मजलिस में कर्बला के पैग़ाम पर डाली गई रौशनी


बुलन्द संदेश/ मौहम्मद अब्बास 


मुरादाबाद। मुहर्रम 1448 हिजरी की दूसरी तारीख़ को नगर में अज़ादारी का सिलसिला पूरी अकीदत और एहतराम के साथ जारी रहा। इस अवसर पर अज़ाद नगर कॉलोनी में अली गौहर एवं सलीम मेहदी के आवास से अलम-ए-मुबारक अज़ादारों की मौजूदगी में बरामद हुआ। नौहाख्वानी और मातम के साथ निकाला गया यह जुलूस विभिन्न मार्गों से होता हुआ इमामबाड़ा मोहम्मदिया हॉल पहुँचा।

जुलूस में शामिल अज़ादारों ने "या हुसैन (अ.स.)", "या अब्बास (अ.स.)" की सदाओं के बीच मातम कर शोहदाए कर्बला को ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया। पूरे मार्ग में ग़म-ए-हुसैन का माहौल दिखाई दिया तथा लोगों ने अलम-ए-मुबारक की ज़ियारत कर अपनी अकीदत का इज़हार किया।

इमामबाड़ा मोहम्मदिया हॉल पहुँचने के उपरांत अनवर अली उर्फ कम्मन की जानिब से मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया। आप रिपोर्ट में यह संशोधन कर सकते हैं:

"मजलिस को अमरोहा से तशरीफ़ लाए मौलाना शेहवार हुसैन नक़वी साहब ने ख़िताब किया। उन्होंने वाक़ेआ-ए-कर्बला, फ़लसफ़ा-ए-शहादत और इमाम हुसैन (अ.स.) की अज़ीम कुर्बानियों पर रौशनी डालते हुए कहा कि कर्बला इंसानियत, सब्र, इस्तिक़ामत और हक़ की राह में डटे रहने का सबसे बड़ा पैग़ाम है। मौलाना के दर्द भरे बयान को सुनकर अज़ादार अश्कबार हो गए और पूरे इमामबाड़े में ग़म व अकीदत का माहौल तारी हो गया।"
अनवर अली उर्फ कम्मन की जानिब से मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया" मजलिस में ज़ाकिर-ए-अहलेबैत ने फ़ज़ाइल-ए-अहलेबैत (अ.स.) तथा वाक़ेआ-ए-कर्बला के विभिन्न पहलुओं पर रौशनी डालते हुए इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके जाँनिसार साथियों की बेमिसाल कुर्बानियों को बयान किया। उन्होंने कहा कि कर्बला इंसानियत, सब्र, इस्तिक़ामत और हक़ के लिए हर दौर में मशाल-ए-राह है तथा इमाम हुसैन (अ.स.) का पैग़ाम आज भी दुनिया को ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने का हौसला देता है।

मजलिस के दौरान अज़ादारों ने ग़मगीन माहौल में पुरसा पेश किया और शुभकामनाएं शोहदाए कर्बला की याद में मातम किया। मजलिस के समापन पर मुल्क की तरक़्क़ी, अमन-ओ-अमान और कौमी यकजहती के लिए दुआ कराई गई।

इस मौके पर मोहम्मदिया हाल के मुतवल्ली हाजी डॉ कायम रज़ा,सलमान बाक़री, दानिश,वसी अब्बास, असबत हुसैन, ज़ैनुल काज़मी, शबाब नक़वी, कमर अब्बास बाक़री, मोहम्मद अली, ज़ैन, सादिक़ आबदी, ज़मीर अब्बास,  जाफर  अब्बास, राघिब अली, काशिफ, नाज़िश, खुशनूद अनवर सहित बड़ी संख्या में अज़ादार मौजूद रहे। कार्यक्रम में शिया एवं सुन्नी समुदाय के लोगों ने भी शिरकत कर गंगा-जमुनी तहज़ीब, भाईचारे और इमाम हुसैन (अ.स.) से अपनी मोहब्बत का इज़हार किया।