बच्चे का डीएनए पिता से मिलता है? जानिए विज्ञान क्या कहता है
अक्सर समाज में यह सवाल उठता रहता है कि क्या बच्चे का डीएनए उसके पिता से मिलता है या केवल मां से। कई बार पारिवारिक विवादों, पहचान के सवालों या सामान्य जिज्ञासा के कारण लोग इस विषय को लेकर चर्चा करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो बच्चे का डीएनए माता और पिता दोनों से मिलता है और यही कारण है कि बच्चे में दोनों की झलक दिखाई देती है।
डीएनए क्या होता है
डीएनए हमारे शरीर की आनुवंशिक जानकारी को संजोकर रखने वाला तत्व होता है। इसमें ही यह तय होता है कि व्यक्ति का रंग कैसा होगा, बाल कैसे होंगे, कद कितना होगा, आंखों का रंग क्या होगा और कई शारीरिक विशेषताएं कैसी होंगी। यह सारी जानकारी माता और पिता से मिलकर बच्चे में आती है।
बच्चे को माता-पिता से कितना डीएनए मिलता है
वैज्ञानिकों के अनुसार बच्चे को लगभग 50 प्रतिशत डीएनए मां से और 50 प्रतिशत डीएनए पिता से मिलता है। यही कारण है कि बच्चा कई मामलों में मां जैसा और कई मामलों में पिता जैसा दिखाई देता है। कभी-कभी बच्चे की शक्ल पूरी तरह पिता पर चली जाती है, जबकि कई बार वह मां की तरह दिखता है। यह पूरी तरह जीन के संयोजन पर निर्भर करता है।
बच्चा किस पर जाएगा, यह कैसे तय होता है
यह बात पहले से तय नहीं होती कि बच्चा मां पर जाएगा या पिता पर। जीन का संयोजन यादृच्छिक होता है, यानी दोनों से मिले गुण अलग-अलग तरीके से मिलते हैं। इसी वजह से एक ही माता-पिता के दो बच्चे भी एक-दूसरे से अलग दिख सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर:
रंग मां जैसा और आंखें पिता जैसी हो सकती हैं
बाल पिता जैसे और चेहरे की बनावट मां जैसी हो सकती है
कद दादा-दादी या नाना-नानी पर भी जा सकता है
इसका मतलब यह है कि डीएनए केवल मां-बाप तक सीमित नहीं होता, बल्कि कई पीढ़ियों के गुण भी बच्चे में आ सकते हैं।
लड़का या लड़की होने में पिता की भूमिका
वैज्ञानिक रूप से बच्चे का लिंग तय करने में पिता की भूमिका अहम होती है। मां की ओर से हमेशा एक ही प्रकार का गुणसूत्र मिलता है, जबकि पिता की ओर से दो प्रकार के गुणसूत्र हो सकते हैं। यही कारण है कि बच्चा लड़का होगा या लड़की, यह पिता के गुणसूत्र पर निर्भर करता है।
डीएनए टेस्ट से पिता की पहचान कैसे होती है
आज के समय में डीएनए टेस्ट को रिश्ते की पहचान का सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है। इस जांच में बच्चे और कथित पिता के नमूने लेकर उनका वैज्ञानिक तरीके से मिलान किया जाता है।
इस प्रक्रिया में:
बच्चे का नमूना लिया जाता है
पिता का नमूना लिया जाता है
दोनों के आनुवंशिक मार्कर मिलाए जाते हैं
मेल होने पर रिश्ते की पुष्टि हो जाती है
अगर डीएनए का मिलान लगभग पूरी तरह हो जाता है, तो यह माना जाता है कि वही व्यक्ति बच्चे का जैविक पिता है।
डीएनए सैंपल कैसे लिया जाता है
डीएनए जांच के लिए आमतौर पर आसान तरीके अपनाए जाते हैं। इसमें किसी तरह की बड़ी प्रक्रिया नहीं होती।
सामान्य तरीके:
मुंह के अंदर से कॉटन स्वैब
खून का नमूना
बाल (जड़ सहित)
कभी-कभी नाखून या अन्य ऊतक
यह प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती है।
बच्चे में दोनों परिवारों की झलक
डीएनए के कारण बच्चा केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आनुवंशिक विशेषताओं को भी अपने साथ लेकर चलता है। कई बार बच्चा दादा, नाना या किसी अन्य रिश्तेदार जैसा दिखाई देता है। यह पूरी तरह जीन के मिश्रण का परिणाम होता है।
सामाजिक भ्रांतियां और सच्चाई
समाज में कई बार यह कहा जाता है कि बच्चा केवल पिता पर गया है या केवल मां पर। जबकि विज्ञान के अनुसार ऐसा संभव नहीं है। हर बच्चे में दोनों का योगदान होता है। किसी एक से ज्यादा समानता दिखना सामान्य बात है, लेकिन डीएनए दोनों से मिलता है।
निष्कर्ष
वैज्ञानिक दृष्टि से स्पष्ट है कि बच्चे का डीएनए माता और पिता दोनों से मिलता है। बच्चे में दिखाई देने वाली हर शारीरिक और कई मानसिक विशेषताएं दोनों के आनुवंशिक गुणों का मिश्रण होती हैं। इसी वजह से हर बच्चा अपने आप में अलग और खास होता है। डीएनए जांच के माध्यम से पिता की पहचान भी वैज्ञानिक तरीके से की जा सकती है, जिसे आज सबसे विश्वसनीय प्रमाण माना जाता है।


