संभल। कभी पारंपरिक हुनर और सीमित संसाधनों तक सिमटा संभल का हॉर्न-बोन उद्योग अब सरकारी सहयोग के साथ नई संभावनाओं की ओर बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत पारंपरिक हॉर्न-बोन शिल्प से जुड़े उद्यमियों और शिल्पियों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जा रही है। इसका असर यह है कि जिले में स्थापित सभी इकाइयां वर्तमान में सक्रिय हैं और पोर्टल पर कोई आवेदन लंबित नहीं है।
*लक्ष्य से आगे बढ़ा ओडीओपी का विस्तार*
वित्तीय वर्ष 2026-27 में हॉर्न-बोन उद्योग के लिए 31 इकाइयों की स्थापना और ₹125 लाख मार्जिन मनी का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके मुकाबले विभाग को 33 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें कुल परियोजना लागत ₹125.75 लाख रही। विभागीय परीक्षण के बाद 24 प्रस्ताव, कुल ₹95.75 लाख की परियोजना लागत के साथ, बैंकों को भेजे गए। बैंकों ने इनमें से 10 आवेदनों को स्वीकृति दी, जिनकी कुल परियोजना लागत ₹58.20 लाख है। इनमें से 9 उद्यमियों को ₹57.19 लाख का ऋण उपलब्ध कराया गया है और ₹43.44 लाख की मार्जिन मनी वितरित की जा चुकी है।
*तीन वर्षों में 50 नई इकाइयों ने पकड़ी रफ्तार, करोड़ों की वित्तीय मदद*
हॉर्न-बोन उद्योग को मजबूत करने के प्रयासों का असर पिछले तीन वित्तीय वर्षों में भी दिखाई दिया है। वर्ष 2023-24 में 10 इकाइयों को ₹57.38 लाख, वर्ष 2024-25 में 25 इकाइयों को ₹75.90 लाख और वर्ष 2025-26 में 15 इकाइयों को ₹115.74 लाख की सहायता उपलब्ध कराई गई।इस तरह तीन वर्षों में कुल 50 नई हॉर्न-बोन इकाइयों को सहायता मिली। इन तीन वर्षों में वितरित सहायता की कुल राशि ₹249.02 लाख यानी ₹2.4902 करोड़ रही। वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष में वितरित ₹43.44 लाख की मार्जिन मनी को जोड़ने पर कुल राशि ₹292.46 लाख यानी ₹2.9246 करोड़ होती है।
*800 शिल्पियों को प्रशिक्षण और टूलकिट से मिला संबल*
सरकार की ओर से केवल इकाइयों की स्थापना तक ही सहयोग सीमित नहीं है। शिल्पियों को आधुनिक तकनीक और उपकरणों से जोड़ने के लिए प्रशिक्षण और टूलकिट भी उपलब्ध कराई गई है। वर्ष 2023-24 में 250, वर्ष 2024-25 में 250 और वर्ष 2025-26 में 300 शिल्पियों को प्रशिक्षण एवं टूलकिट का लाभ दिया गया। इस तरह कुल 800 शिल्पियों को प्रशिक्षित किया गया। विभाग के अनुसार सभी निर्धारित लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरे किए गए हैं।आधुनिक टूल्स मिलने से उत्पादों की फिनिशिंग बेहतर होने के साथ उत्पादन में लगने वाले समय और मेहनत में भी कमी आई है। इससे शिल्पियों को अधिक प्रभावी तरीके से उत्पादन करने में मदद मिल रही है।
*स्थानीय हुनर को मिल रही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग*
ओडीओपी योजना के तहत वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और आधुनिक उपकरणों का लाभ मिलने से संभल की हॉर्न-बोन शिल्प इकाइयां लगातार सक्रिय हैं। वर्तमान में लाभार्थी इकाइयां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्पादों की मांग बढ़ने से स्थानीय शिल्पियों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।उपायुक्त उद्योग मुकेश कुमार ने बताया कि ओडीओपी योजना के माध्यम से पारंपरिक हॉर्न-बोन उद्योग से जुड़े उद्यमियों को वित्तीय सहायता के साथ प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट उपलब्ध कराई जा रही है। इससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी मजबूत हुए हैं।
उपायुक्त उद्योग मुकेश कुमार ने कहा कि बीते तीन वर्षों में 50 नई इकाईयों की स्थापना, प्रशिक्षण और टूल किट से स्थानीय उत्पादन एवं रोजगार को मजबूती मिली है।
*हस्तशिल्पियों की समृद्धि से जिले की अर्थव्यवस्था को मिल रही नई गति: डीएम*
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने कहा, "ओडीओपी योजना संभल के ऐतिहासिक हॉर्न-बोन शिल्प को वैश्विक पटल पर स्थापित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने में गेमचेंजर साबित हुई है। वित्तीय संबल, समयबद्ध ऋण और आधुनिक टूलकिट मिलने से हमारे पारंपरिक शिल्पियों की उत्पादकता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रशासन का संकल्प है कि हर पात्र कारीगर तक शासन की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचे, ताकि संभल का यह बेजोड़ हस्तशिल्प जिले के औद्योगिक विकास और युवाओं के लिए नए रोजगार सृजन का प्रमुख आधार बने।"


