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उत्तर प्रदेश

14 सफ़र 1448 मूताबिक 29 जुलाई 2026 को इमामबाड़ा पीर जी फन्देड़ी सादात मे अशरा ए अरबाईन की चौथी मजलिस

14 सफ़र 1448 मूताबिक 29 जुलाई 2026 को इमामबाड़ा पीर जी फन्देड़ी सादात मे अशरा ए अरबाईन की चौथी मजलिस

बुलन्द संदेश ब्यूरो

अमरोहा (डा. महताब अमरोहवी )तहसील धनौरा 14 सफ़र 1448 मूताबिक 29 जुलाई 2026 को इमामबाड़ा पीर जी फन्देड़ी सादात मे अशरा ए अरबाईन की चौथी मजलिस का आगाज़ मरसियाख्वानी से अली अब्बास,साहिल अब्बास,अमन अब्बास,अली वारिस,शबी अब्बास ने सयुंक्त रूप से किया पेशखानी मिनहाल रज़ा ने प्रस्तुत किया मजलिस का शीर्षक रहा अम्र बिल मअरूफ़ (नेकी का हुक्म देना) मजलिस मे संचालन मौलाना मोहम्मद काज़ीम सिरसिवी ने किया मजलिस को गुजरात के भावनगर से आए मौलाना तहक़ीक़ हुसैन रिज़वी ने ख़िताब किया। मौलाना रिज़वी ने अम्र बिल मअरूफ़ फ़ुरू-ए-दीन का एक अज़ीम फ़रीज़ा है। इसका मतलब है लोगों को नेकी, भलाई, इंसाफ़, अख़्लाक़ और अल्लाह की इताअत की तरफ़ बुलाना।एक मोमिन सिर्फ़ ख़ुद नेक बनने पर इक्तिफ़ा नहीं करता, बल्कि अपनी औलाद,अपने अहल-ए-ख़ाना, दोस्तों, पड़ोसियों और पूरे मुआशरे में नेकी को आम करने की कोशिश भी करता है।तुम में एक ऐसी जमाअत होनी चाहिए जो भलाई की तरफ़ बुलाए, नेकी का हुक्म दे और बुराई से रोके, और वही लोग कामयाब हैं।अम्र बिल मअरूफ़ का मक़सद किसी को ज़लील करना या उस पर अपनी बरतरी जताना नहीं, बल्कि मोहब्बत, हिकमत, नर्मी और अख़्लाक़ के साथ उसे सही रास्ता दिखाना है।अगर नसीहत में सख़्ती, तौहीन और घमंड हो जाए, तो उसका असर कम हो जाता है। इस्लाम ने दावत और इस्लाह का रास्ता हुस्ने-अख़्लाक़ के साथ अपनाने की तालीम दी है। नबी स व ने कहा कि तुम में से जो कोई बुराई देखे,उसे अपने हाथ से रोके; अगर इसकी ताक़त न हो तो अपनी ज़बान से रोके और अगर इसकी भी ताक़त न हो तो अपने दिल में उसे बुरा जाने, और यह ईमान का सबसे मजबूत दर्जा है।इमाम अली ने कहा फ़रमाया नेकी का हुक्म देना और बुराई से रोकना अंबिया और नेक बंदों का रास्ता है। इसी से फ़र्ज़ क़ायम रहते हैं, रास्ते महफ़ूज़ होते हैं, हलाल रोज़ी बाक़ी रहती है और ज़ुल्म का ख़ात्मा होता है।अहलेबैत (अलैहिमुस्सलाम) की पूरी ज़िंदगी अम्र बिल मअरूफ़ का ज़िंदा नमूना है। इमाम हुसैन (अ.स.) ने भी अपने क़ियाम का मक़सद बयान करते हुए फ़रमाया कि वह अपने नाना की उम्मत की इस्लाह और अम्र बिल मअरूफ़ व नह्य अनिल मुनकर के लिए निकले हैं।यानी एक सच्चा मोमिन हर दौर में हक़ और इंसाफ़ की आवाज़ बुलंद करता है।आज के दौर में अम्र बिल मअरूफ़ का मतलब सिर्फ़ इबादत की दावत देना नहीं, बल्कि सच बोलना, वालिदैन की ख़िदमत करना, यतीमों और ग़रीबों की मदद करना, रिश्वत, झूठ, धोखा, नफ़रत और ज़ुल्म से बचने की नसीहत करना, और इंसाफ़ व इंसानियत को फ़रोग़ देना भी है। अगर हर इंसान अपनी ज़िम्मेदारी समझकर नेकी को फैलाए, तो मुआशरा अमन, मोहब्बत और भाईचारे का गहवारा बन सकता है। मौलाना रिज़वी ने इमाम हुसैन अ स और उन के अहलेहरम पर हुए ज़ुल्मों सितम को बयान किया मौलाना ने इमाम ज़ैनुल आबेदीन अ स बीबी ज़ैनब अ स और बीबी सकीना अ स पर हुए ज़ुल्मों को बयान किया बीबी सकीना अ स की ज़िंदाने शाम मे हुई शहादत को बयान किया अज़ादारों ने गिरयाओ बुका किया अंजुमन दस्ता ए मासूमिया,अंजुमन दस्ता ए असगरिया के नोहाखा खुशहाल,मोहम्मद मेंहदी अबरार रज़ा,साहिल ज़ैदी ने नोहाखानी की और अंजुमन ने सीनाज़नी की इस दौरान मौलाना अली इमाम,मौलाना अबरार हुसैन,मौलाना मोओस्सिर अब्बास,मौलाना मोहम्मद मेंहदी,मौलाना इसरार हैदर,मौलाना मोहम्मद जाफर क़ुम्मी,मौलाना गुलाम रज़ा,शमीम हैदर,काजी जाफर,चिराग अली,मनव्वर अली,अनवर अली,शहज़ान मुरतुज़ा,अमाद समीर,मुसाव्विर रज़ा,ज़फर मेंहदी,मंसूर रज़ा,रियाज मोहम्मद,मास्टर मोहम्मद रज़ा,मास्टर सय्यद मोहम्मद,कमर हैदर,हुसैन अली,चमन अब्बास,रेहान हैदर,सय्यद मोहम्मद विला,तालिब हुसैन,कर्रार अब्बास,अबुतालिब,माजिद हुसैन,ज़ैदी बशारत,नईम हैदर,शजर अब्बास,तुफैल हुसैन बल्लन,ज़री हैदर,मोहम्मद गाजी,अल्तामिश ज़ैदी,ज़ुल्फ़ेकार शब्लू,शामिल रज़ा,मुख़्तार हुसैन,नूर अली, सिप्तैन,नाज़िर हैदर,आबाद अली,इक़बाल हुसैन,जाफर,आलमदार हुसैन,मोहसिन क़र्बलाई,शोयब यूट्यूबर,ज़ुल्फ़ेकार अली,एम ए ज़ैदी एडवोकेट और बस्ती के तमाम अज़ादार मौजूद रहे