बुलन्द संदेश ब्यूरो
*आईजीआरएस पर शिकायत बंद, जमीनी हकीकत जस की तस; कवि नगर जोन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल*
गाजियाबाद (आशा चौधरी) मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि प्रदेश की कोई भी सड़क, गली या सार्वजनिक स्थान अंधेरे में न रहे, लेकिन गाजियाबाद की अवंतिका कॉलोनी में तस्वीर इसके उलट दिखाई दे रही है। स्ट्रीट लाइट न होने की शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर दर्ज होने के बावजूद क्षेत्र आज भी अंधेरे में डूबा हुआ है। शिकायतकर्ता आशु का आरोप है कि *संदर्भ संख्या 40014026047077* पर दर्ज शिकायत का वास्तविक समाधान करने के बजाय कवि नगर जोन से औपचारिक रिपोर्ट लगाकर मामला बंद कर दिया गया। रिपोर्ट में स्थल निरीक्षण और वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद कार्य कराने की बात कही गई, जबकि मौके पर स्थिति पहले जैसी ही बनी हुई है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम कार्यालय में लिखित शिकायत देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि *कवि नगर जोन में शिकायतों के निस्तारण से ज्यादा उन्हें कागजों में समाप्त करने की परंपरा बनती जा रही है।* लोग कई-कई बार नगर निगम और जोन कार्यालय के चक्कर लगाते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिलता।
अब इस मामले में एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है। *नगर निगम हर वर्ष कितनी स्ट्रीट लाइट खरीदता है, कितनी विभिन्न वार्डों में लगाई जाती हैं और कितनी अब भी स्टोर में पड़ी हैं?* यदि सरकार स्ट्रीट लाइट उपलब्ध करा रही है तो अंधेरे वाले क्षेत्रों तक वे क्यों नहीं पहुंच रही हैं? क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि स्ट्रीट लाइट की खरीद, वितरण और स्थापना का वार्डवार ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए, ताकि सरकारी संसाधनों के उपयोग में पारदर्शिता बनी रहे।

लोगों का कहना है कि वे नियमित रूप से हाउस टैक्स जमा करते हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं। ऐसे में नगर निगम की जवाबदेही तय होना जरूरी है। क्षेत्रवासियों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच, आईजीआरएस पर लगाए गए निस्तारण की समीक्षा और अवंतिका कॉलोनी में तत्काल स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की है।


