बुलन्द संदेश ब्यूरो
*आरटीई के चयनित बच्चों को प्रवेश न देने वाले विद्यालयों को मोहलत नहीं मान्यता रद्द, करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए आईपीए*
गाज़ियाबाद (आशा चौधरी) इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा त्यागी ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत चयनित बच्चों को प्रवेश न देने वाले निजी विद्यालयों को पुनः तीन दिन की मोहलत दिए जाने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आरटीई कानून के तहत चयनित प्रत्येक बच्चे को प्रवेश देना संबंधित विद्यालय की कानूनी एवं अनिवार्य जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की मनमानी, अनावश्यक दस्तावेजों की मांग अथवा प्रवेश में देरी कानून का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(सी ) के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के चयनित बच्चों को निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश देना प्रत्येक मान्यता प्राप्त विद्यालय के लिए बाध्यकारी है। इसके अतिरिक्त धारा 8 एवं धारा 9 राज्य सरकार एवं स्थानीय प्राधिकरण पर यह दायित्व निर्धारित करती हैं कि प्रत्येक पात्र बच्चे को समयबद्ध रूप से प्रवेश सुनिश्चित कराया जाए।
सीमा त्यागी ने कहा कि प्रशासन द्वारा जिन विद्यालयों से स्पष्टीकरण मांगा गया है, उनमें डीपीएस मेरठ रोड, केआर मंगलम स्कूल वैशाली, डीपीएस सिद्धार्थ विहार, जिंदल पब्लिक स्कूल शौर्यपुरम एक्सटेंशन, दिल्ली पब्लिक स्कूल प्रताप विहार, सेंट जेवियर्सy वर्ल्ड स्कूल मोरटा, एलन हाउस स्कूल वसुंधरा, गौतम पब्लिक स्कूल प्रताप विहार, रोज वैली पब्लिक स्कूल बाईपास विजय नगर, तुलसीराम माहेश्वरी पब्लिक स्कूल भोजपुर, चिल्ड्रन्स अकादमी प्रताप विहार तथा सीपी आर्य पब्लिक स्कूल स्वर्ण जयंतीपुरम सहित कुल 17 निजी विद्यालय शामिल हैं। इन विद्यालयों द्वारा अभिभावकों से बैंक स्टेटमेंट, घर का सत्यापन तथा अन्य गैर-आवश्यक दस्तावेज मांगकर प्रवेश में बाधा उत्पन्न करना पूर्णतः अनुचित एवं कानून की भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित तीन दिनों की अवधि के भीतर इन विद्यालयों द्वारा सभी चयनित बच्चों को प्रवेश नहीं दिया जाता है, तो जिला प्रशासन को तत्काल उत्तर प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली, 2011 तथा अन्य प्रासंगिक विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कठोर कार्रवाई करते हुए मान्यता निरस्त करने की संस्तुति, विद्यालय को सील करने तथा संबंधित प्रबंधन के विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
सीमा त्यागी ने कहा कि आरटीई कोई दया या अनुकंपा नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21(क) के अंतर्गत प्रत्येक बच्चे का मौलिक अधिकार है। इसे बाधित करने वाले किसी भी विद्यालय को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि इंडियन पेरेंट्स एसोसिएशन पिछले कई वर्षों से हजारों आरटीई चयनित बच्चों को उनका संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए संघर्षरत है और भविष्य में भी किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो एसोसिएशन इस विषय को उत्तर प्रदेश शासन, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) तथा माननीय उच्च न्यायालय तक भी ले जाएगा l


