बुलन्द संदेश ब्यूरो
आज़मगढ़ आम लोगों की तरह घर से निकल पड़ना,न आगे-पीछे गाड़ियों का लंबा काफ़िला, न सायरन का शोर, न भारी-भरकम सिक्योरिटी और न ही किसी तरह का लाव-लश्कर...कभी पैदल गलियों में लोगों का हालचाल पूछते हुए, तो कभी साइकिल पर सवार होकर अपने क्षेत्र का दौरा करते हुए यही थी आलम बदी साहब की सादगी की पहचान उन्होंने हमेशा यह एहसास दिलाया कि जनता का नुमाइंदा होने का मतलब जनता से दूरी बनाना नहीं, बल्कि उनके बीच रहकर उनके सुख दुख में शरीक होना और उनके जैसी ही आम ज़िन्दगी गुज़ारना है
आज के दौर में जब सियासत को शानो-शौकत, बड़े काफिलों और दिखावे से जोड़ा जाता है...ऐसे वक़्त में निज़ामाबाद के 5 बार के विधायक आलम बदी साहब अपनी सादगी, ख़ुलूस और ज़मीन से जुड़े अंदाज़ की वजह से हमेशा याद किये जाएंगे


