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उत्तर प्रदेश

बिना सूचना लाखों उपभोक्ताओं का बिजली लोड बढ़ाने पर उठे सवाल, AAP ने जांच और रोक की मांग की

बिना सूचना लाखों उपभोक्ताओं का बिजली लोड बढ़ाने पर उठे सवाल, AAP ने जांच और रोक की मांग की

बुलंद संदेश ब्यूरो

मथुरा। आम आदमी पार्टी यूथ विंग के पूर्व प्रदेश कमेटी सदस्य आदेश शर्मा ने उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) द्वारा प्रदेश के लगभग 46.79 लाख विद्युत उपभोक्ताओं का बिना पूर्व सूचना और बिना व्यक्तिगत नोटिस के विद्युत भार (लोड) बढ़ाए जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस कार्रवाई को उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला कदम बताते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

 

आदेश शर्मा ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन ने बिलिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से करीब 46,79,450 उपभोक्ताओं का स्वीकृत भार बढ़ा दिया। उनका कहना है कि नियामक आयोग के टैरिफ आदेश का हवाला देकर यह कार्रवाई की गई, जबकि नियमों के अनुसार किसी भी उपभोक्ता का भार बढ़ाने से पहले उसे विस्तृत सूचना देना और अपनी आपत्ति दर्ज कराने का अवसर देना अनिवार्य है। उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों उपभोक्ताओं को यह भी नहीं बताया गया कि उनका भार किन आधारों पर बढ़ाया गया।

 

उन्होंने कहा कि Electricity Supply Code-2005 (संशोधित) में स्पष्ट प्रावधान है कि स्वीकृत भार बढ़ाने से कम से कम एक माह पहले उपभोक्ता को नोटिस दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद सीधे बिलिंग सॉफ्टवेयर में भार संशोधित कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय और उपभोक्ता अधिकारों के विपरीत है।

 

आदेश शर्मा के अनुसार, प्रभावित उपभोक्ताओं में लगभग 50 प्रतिशत स्मार्ट मीटर उपभोक्ता हैं। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरों की रीडिंग को लेकर पहले से ही अनेक शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में उन्हीं आंकड़ों के आधार पर भार बढ़ाना उचित नहीं माना जा सकता।

 

उन्होंने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में 13,39,827, मध्यांचल में 12,58,363, पश्चिमांचल में 10,14,908, दक्षिणांचल में 9,60,148 तथा केस्को क्षेत्र में 1,06,214 उपभोक्ताओं का भार बढ़ाया गया है। इस प्रकार कुल लगभग 46,79,450 उपभोक्ता इस कार्रवाई से प्रभावित हुए हैं।

 

आदेश शर्मा ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं का कुल संयोजित भार लगातार बढ़ाया जा रहा है, जबकि विद्युत वितरण व्यवस्था का विस्तार उसी अनुपात में नहीं हुआ है। उनका कहना है कि इससे भविष्य में बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में वाणिज्यिक उपभोक्ताओं का भार बढ़ाने के बावजूद विद्युत सुरक्षा विभाग से नई एनओसी नहीं ली गई, जो सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर विषय है।

 

उन्होंने उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग से मांग की है कि बिना पूर्व सूचना बढ़ाए गए सभी विद्युत भार की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, प्रत्येक प्रभावित उपभोक्ता को भार वृद्धि का आधार उपलब्ध कराया जाए तथा यदि कार्रवाई नियमों के विपरीत पाई जाए तो सभी बढ़े हुए भार को तत्काल पूर्ववत किया जाए।