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उत्तर प्रदेश

*भारत गौरव गाथा ने जगाया राष्ट्रभक्ति का ज्वार हिंदी भवन ग़ाज़ियाबाद के मंच पर जीवंत हुआ 3000 वर्षों का गौरवशाली इतिहास* ।

*भारत गौरव गाथा ने जगाया राष्ट्रभक्ति का ज्वार हिंदी भवन ग़ाज़ियाबाद के मंच पर जीवंत हुआ 3000 वर्षों का गौरवशाली इतिहास* ।

बुलन्द संदेश /ब्यूरो

 

गाजियाबाद (आशा चौधरी) भारत माता सांस्कृतिक संस्थान के तत्वाधान मे हिन्दी भवन मे साहित्य, संगीत, फिल्म, नृत्य,कविता, रंगमंच और कथक के संगम से सजी अद्भुत प्रस्तुति "भारत गौरव गाथा" ने दर्शकों को भारत के गौरवशाली अतीत की ऐसी यात्रा कराई, जिसने सभागार में बैठे हर व्यक्ति को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम के दौरान कई बार पूरा ऑडिटोरियम "भारत माता की जय", "वंदे मातरम्" और "जय हिंद" के नारों से गूंज उठा।

चारों तरफ लहराते हुए भारतीय झंडो ने देशभक्ति का एक अलग ही वातावरण पैदा कर दिया।

 भारत माता की और देश के शहीदों के पूजन के वक्त चारों तरफ जलते हुए दीपक अलग किस्म का माहौल पैदा कर रहे थे।

रविवार दिनांक 12 जुलाई 2026 को हिंदी भवन ग़ाज़ियाबाद मे इस भव्य कार्यक्रम में लगभग 90 मिनट के भीतर भारत के तीन हजार वर्षों के संघर्ष, बलिदान और वैभव को प्रभावशाली ढंग से मंचित किया गया। ऐतिहासिक घटनाओं, प्रेरक प्रसंगों और भावनात्मक दृश्यों ने दर्शकों को कभी रोमांचित किया तो कभी उनकी आंखें नम कर दीं।,,कभी शौर्य , कभी आंसू, कभी सम्मान , कभी करुणा, जाने कितने भाव दर्शकों के चेहरों पर दिखे।

अंतर्राष्ट्रीय कवि विनीत चौहान कृत विश्व प्रसिद्ध काव्य नाटिका 'भारत गौरव गाथा' लोगों को , विशेष रूप से युवा पीढ़ी को देश के गौरवशाली इतिहास से अवगत कराती है।कार्यक्रम में मुगलकालीन अत्याचारों के विरुद्ध संघर्ष, गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों की अमर शहादत, रानी लक्ष्मीबाई के अदम्य साहस तथा 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की गाथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रत्येक दृश्य दर्शकों के मन में राष्ट्रप्रेम और स्वाभिमान की भावना को और प्रबल करता गया।

सबसे मार्मिक क्षण तब आया जब मंच पर शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उनकी मां के बीच जेल में हुई अंतिम मुलाकात का दृश्य प्रस्तुत किया गया। मां की ममता और बेटे के राष्ट्र के प्रति समर्पण को दर्शाते इस दृश्य ने पूरे सभागार को भावुक कर दिया। वहीं वीर सावरकर और उनकी पत्नी के संवाद ने स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और संघर्ष की पीड़ा को सजीव कर दिया।कार्यक्रम ने केवल स्वतंत्रता आंदोलन ही नहीं, बल्कि पुलवामा के वीर जवानों तक की गाथा को मंच पर उतारकर राष्ट्ररक्षा में दिए गए बलिदानों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रस्तुति समाप्त होने तक अनेक दर्शकों की आंखें नम थीं और हृदय गर्व से भर उठा था। ये रहे कार्यक्रम के प्रमुख सहभागी कार्यक्रम के मुख्य सूत्रधार के रूप में अलवर के सुप्रसिद्ध कवि विनीत चौहान ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों को पूरे समय बांधे रखा। वीर सावरकर की भूमिका में प्रभावशाली अभिनय किया, जबकि अन्य कलाकारों ने भी अपने सशक्त अभिनय से ऐतिहासिक पात्रों को जीवंत कर दिया।

"भारत गौरव गाथा" केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की अस्मिता, संघर्ष, बलिदान और गौरव का ऐसा जीवंत दस्तावेज बना, जिसने दर्शकों के मन में राष्ट्रभक्ति की नई चेतना का संचार किया। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि गुरु पवन सिन्हा का सानिध्य प्राप्त हुआ । कार्यक्रम के संयोजक ललित जयसवाल रहे । कार्यक्रम मे मुख्य रूप से गुरु माँ, पावन चिंतन धारा आश्रम, ललित जयसवाल , राज कौशिक , कवि प्रवीण शुक्ल, कवि संदीप भोला, सुभाष गर्ग हिमांशु लव, अमरदत्त शर्मा मुख्य रूप से उपस्थित थे ।