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उत्तर प्रदेश

हक की राह पर चलने वालों का परचम हमेशा बुलन्द रहता है : डॉ.आबिद हुसैन

हक की राह पर चलने वालों का परचम हमेशा बुलन्द रहता है : डॉ.आबिद हुसैन

बुलन्द संदेश/लायबा नूर


 सम्भल नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत के गम में शहर भर में मजलिसों और मातम का सिलसिला लगातार जारी है। इसी क्रम में शहर के मोहल्ला नूरियो सराय स्थित इमामबारगाह हाजी अजहर हुसैन में मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस के बाद अलम-ए-मुबारक बरामद कर अज़ादारों को जियारत कराई गई। देर रात तक विभिन्न अंजुमनों ने मातम और नौहाख्वानी कर शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मजलिस को खिताब करते हुए डॉ.आबिद हुसैन ने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी अहलेबैत से मोहब्बत और अकीदत का बेहतरीन ज़रिया है उन्होंने कहा कि दीन-ए-इस्लाम की बका के लिए इमाम हुसैन ने कर्बला के मैदान में महान कुर्बानियां दीं उन्होंने कहा कि जिससे सच्ची मोहब्बत होती है, उसकी शहादत और कुर्बानी को याद कर इंसान की आंखें नम हो जाती हैं कर्बला में दस मोहर्रम को इमाम हुसैन और उनके साथियों को तीन दिन तक भूखा-प्यासा रखकर शहीद किया गया था
उन्होंने हज़रत अब्बास अलमदार की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि आज पूरी दुनिया में उनके नाम का अलम सजाया और उठाया जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि हक की राह पर चलने वालों का परचम हमेशा बुलंद रहता है, जबकि जालिमों का नामोनिशान मिट जाता है।
मजलिस के अंतिम चरण में हज़रत इमाम हुसैन के भाई हज़रत अब्बास अलमदार की शहादत का बयान किया गया, जिसे सुनकर मौजूद अज़ादारों की आंखें अश्कबार हो गईं। इसके बाद शबीहे अलम बरामद किया गया, जिसकी जियारत के बाद अज़ादारों ने मातम और नौहाख्वानी की।
पुरदर्द आवाज में अरशद हसन अमान संभली, शाह आलम मोहम्मद तथा शायर अमीर इमाम ने नौहे पेश कर माहौल को गमगीन बना दिया। इस दौरान मरहूमा आरशिया जैनवी को भी याद किया गया और उनकी मगफिरत के लिए विशेष दुआ की गई। कार्यक्रम का संचालन जनाब मुजामिल जैनवी ने किया।