बुलन्द संदेश/ दानिश अली
सम्भल बुधवार की रात में ग्राम शाहपुर सिरपुडा में अन्जुमन-ए का सज्जादिया (रजि०) द्वारा इमामबारगाह सय्यद आलम अली में मजलिस और शब्बेदारी का आयोजन किया गया। जिसमे ममियाख्वानी इक़लीम रजा व हमनवा ने की तथा खिताबत मौलाना अखलाक मेंहदी ने की। अपने ख़िताब में मौलाना ने मौला हुसैन की क़ुर्बानी का जिक्र करते हुए बताया इमाम हुसैन (अ.स.) ने तीन दिन की भूख और प्यास बर्दाश्त की, उनके 6 महीने के बेटे अली असगर की छाती में भाला का लगा उस मासूम ने भी तीर भूख और प्यास के साथ तड़प तड़प कर तीन दिन कर्बला की तपती रेत पर अपनी जान दे दी इमाम हुसैन (अ.स.) ने यह भी बर्दाश्त किया। लेकिन वक्त के यजीद की गलत नीतियों का समर्थन नहीं किया इन्सानियत की खातिर पूरा घर तबाह हो गया। कर्बला की जंग में जो अपने को जीता हुआ समझ रहा था वो हार गया क्योंकि उसका नाम लेने वाला कोई बाकी नही रहा। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) केवल मुसलमानों के इमाम नही कुल इंसानियत के इमाम आज भी लोगो के दिल मे ज़िंदा है तमाम रात शब्बेदारी में स्थानीय अंजुमनो के अलावा बाहर से आई अन्जुमन-ए- कारवान ए अज़ा, जानसठ मुजफ्फरनगर, अन्जुमन हुसैनी, सिरसी, अंजुमन जाफ़रिया, वाराणसी, अंजुमन सिपाहे हुसैनी, सुल्तानपुर ने सलाम, नौहाख्वानी और सीनाजनी करके खिराज ए अक़ीदत पेश की
कार्यक्रम का समापन सुबह 4:30 बजे हुआ।
कार्यक्रम में स्थानीय लोगो के अलावा बाहर से आये मोमिनिनो ने भारी तादाद में शिरकत की।

अंत मे अंजुमन ए सज्जादिया के अध्यक्ष गुलशन अब्बास और सचिव चमन रज़ा ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
इस अवसर मुख्यरूप से राशिद हुसैन, डॉ० साईम रज़ा, नदीम हुसैन, अली आदिल, अनीस रज़ा, सफी अकबर, शोएब नबी, अमीर रज़ा, खुर्शीद अनवर, अली कम्बर, मोहम्मद मेंहदी, बहाल अख्तर, शारिक तंजीम, हसन हैदर आदि मौजूद रहे


