बुलंद संदेश ब्यूरो
*गेट पर सीलिंग नोटिस. अंदर टिकट बिक्री और स्विमिंग जारी, प्रशासनिक कार्रवाई की खुली पोल या नियमों की खुली अनदेखी?*
गाज़ियाबाद (आशा चौधरी)
दिल्ली और लखनऊ में स्विमिंग पूल से जुड़े दर्दनाक हादसों के बाद पूरे उत्तर प्रदेश में अवैध और सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाले स्विमिंग पूलों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने भी ऐसे प्रतिष्ठानों पर सख्ती दिखाते हुए कई स्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई की। लेकिन गाजियाबाद की वेव सिटी से सामने आई तस्वीरें प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं।

बताया जा रहा है कि वेव सिटी स्थित जिस स्विमिंग पूल को जीडीए ने नियमों के उल्लंघन के आरोप में सील किया था, वहां आज भी गतिविधियां सामान्य रूप से जारी हैं। मौके की तस्वीरों में मुख्य प्रवेश द्वार पर जीडीए का सीलिंग नोटिस स्पष्ट रूप से लगा दिखाई देता है, लेकिन परिसर के भीतर का दृश्य बिल्कुल अलग नजर आता है। टिकट काउंटर पर लोगों की आवाजाही बनी हुई है, कर्मचारी अपने काम में लगे हैं और स्विमिंग पूल में लोग नहाते हुए दिखाई दे रहे हैं।
*यदि किसी परिसर को विधिवत सील किया गया है, तो उसके भीतर किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि कैसे संचालित हो रही है? क्या सीलिंग के बाद भी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है, या फिर कहीं प्रशासनिक निगरानी में कमी है? यह मामला अब कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।*
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी परिसर को सील करने का उद्देश्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और नियमों का पालन कराना होता है। यदि सील किए गए परिसर में दोबारा संचालन होता है, तो यह न केवल प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना है, बल्कि भविष्य में किसी भी संभावित हादसे का खतरा भी बढ़ा सकता है।
*स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जीडीए ने कार्रवाई की है, तो उसका पालन भी सुनिश्चित होना चाहिए। केवल सीलिंग नोटिस लगाने से कार्रवाई पूरी नहीं मानी जा सकती। यदि वास्तव में संचालन जारी है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए*।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि *क्या जीडीए इस पूरे मामले की दोबारा जांच करेगा? क्या सीलिंग के बावजूद संचालन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी? और यदि भविष्य में कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?**
फिलहाल, पूरे मामले पर लोगों की निगाहें गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस मामले में सख्त रुख अपनाता है l या फिर यह मामला भी केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाता है।


