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उत्तर प्रदेश

कुंभकर्ण और मेघनाद वध का मंचन देख भावुक हुए दर्शक

कुंभकर्ण और मेघनाद वध का मंचन देख भावुक हुए दर्शक

श्रीराम चरित्र प्रदर्शन उत्सव में श्री रामा मंडल के कलाकारों ने दिखाई सुलोचना सती की लीला

बुलंद संदेश ब्यूरो:जावेद अब्बासी 

मेरठ। श्रीराम चरित्र प्रदर्शन उत्सव में श्री रामा मंडल के कलाकारों ने कुंभकर्ण वध, मेघनाद वध और सुलोचना सती की लीला का मंचन किया। कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।मंचन में दिखाया गया कि युद्ध में रावण की सेना के लगातार हारने के बाद उसने अपने भाई कुंभकर्ण को नींद से जगाया। माता सीता के हरण को अधर्म बताते हुए कुंभकर्ण ने रावण को समझाया, लेकिन भाई का साथ देने के लिए वह युद्धभूमि में उतर गया। भगवान श्रीराम ने भीषण युद्ध के बाद कुंभकर्ण का वध कर दिया।इसके बाद रावण के पुत्र मेघनाद ने युद्ध की कमान संभाली। उसने अपनी मायावी शक्तियों से वानर सेना को संकट में डाल दिया। लक्ष्मण के मूर्छित होने के प्रसंग के बाद लक्ष्मण ने मेघनाद का वध कर दिया।मेघनाद की मृत्यु का समाचार मिलने पर उसकी पत्नी सुलोचना शोक में डूब गई। वह अपने पति का मस्तक लेने भगवान श्रीराम की छावनी में पहुंची। भगवान श्रीराम ने उसके पतिव्रत धर्म का सम्मान करते हुए मेघनाद का मस्तक उसे सौंप दिया। इसके बाद सुलोचना के सती होने के प्रसंग का मंचन किया गया। इस दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया।इस अवसर पर रामलीला कमेटी के प्रधान मलखान सैनी, संयोजक शरद त्यागी, प्रदीप मित्तल, मूलचंद सैनी, वीरेंद्र सैनी, अजय त्यागी, अभिषेक (दीपु), राहुल, प्रवीण, संजय, संजीव, प्रदीप, प्रमोद सक्सेना, अभिनव मित्तल, रक्षित गर्ग, नवीन बंसल, अंकित और रवि सहित अन्य लोग मौजूद रहे।