बुलन्द संदेश ब्यूरो
अमरोहा (डा, महताब अमरोहवी )शिया बोर्ड के जिला अमरोहा के नोडल अफसर इंजीनयर सुहैल मुर्तज़ा ने कहा कि जब भी वक़्फ़ की जायदादों की चर्चा होती है, क़ौम का पहला निशाना अक्सर मुतवल्ली बनते हैं।उन्हें भ्रष्ट,बेईमान और लापरवाह कह देना बहुत आसान होता है। लेकिन क्या हमने कभी इस समस्या के दूसरे पहलू पर भी ईमानदारी से विचार किया है?सच्चाई यह है कि वक्फ संपत्तियों की दुर्दशा के लिए यदि कहीं मुतवल्ली जवाबदेह हैं,तो वहीं उन किरायेदारों की जिम्मेदारी भी कम नहीं है,जो दशकों से वक्फ की दुकानों, मकानों और ज़मीनों पर नाममात्र के किराये पर काबिज हैं,या फिर सालों से एक रुपया तक किराया अदा नहीं करते।ऐसे लोग वक्फ की आमदनी को रोककर उस अमानत को नुकसान पहुँचा रहे हैं,जो पूरी कौम के लिए वक़्फ़ की गई थी।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि अफसोस यह है कि समाज की आलोचना का केंद्र केवल मुतवल्ली बनते हैं,जबकि वक्फ की संपत्तियों का वास्तविक लाभ उठाने वाले और किराया न देने वाले लोगों से शायद ही कोई सवाल करता है। यह दोहरा मापदंड न्याय और ईमानदारी के सिद्धांतों के विरुद्ध है।यदि कोई मुतवल्ली किराया वसूल नहीं कर पाता,तो उसकी प्रशासनिक या कानूनी कमजोरियों पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।लेकिन यह भी उतना ही आवश्यक है कि किरायेदार अपने नैतिक और धार्मिक दायित्व को समझें। क्या किसी वक्फ की दुकान या मकान पर सालों तक लगभग मुफ्त में काबिज रहना और उचित किराया न देना ईमानदारी कहलाएगा?उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वक्फ की आय से मस्जिदें, इमामबाड़े, कब्रिस्तान,दीनी तालीम, अज़ादारी और समाज के अनेक कल्याणकारी कार्य संचालित होते हैं।जब किराया नहीं आता,तो वास्तव में नुकसान किसी एक मुतवल्ली का नहीं, बल्कि पूरी कौम का होता है।
इसलिए ज़रूरी है कि सिर्फ मुतवल्लियों की आलोचना करने की नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को ईमानदारी से देखने की है। जहां मुतवल्ली अपनी जिम्मेदारियां पूरी न करें, वहां उनसे जवाबदेही अवश्य हो। लेकिन जो किरायेदार सालों से वक्फ की संपत्तियों पर काबिज होकर उचित किराया नहीं दे रहे हैं, उनसे भी उतनी ही सख़्ती और निष्पक्षता के साथ सवाल पूछा जाना चाहिए।वक़्फ की हिफाज़त सिर्फ मुतवल्ली की ज़िम्मेदारी नहीं है,यह हर उस आदमी का फ़र्ज़ है जिसका किसी भी रूप में वक्फ की संपत्ति से सम्बन्ध है, न्याय तभी होगा,जब जवाबदेही सबकी समान रूप से तय होगी, न कि केवल एक पक्ष की


