बुलन्द संदेश ब्यूरो
अमरोहा(डा.महताब अमरोहवी) मुरादाबाद मंडल में14 साल का संघर्ष, छोटा सा सिम और बहन की अटूट निष्ठा इंसाफ का आधार बनी। जिस से बिजनौर के बहुचर्चित प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सात रसूखदार दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। बिजनौर के बहुचर्चित प्रबल अग्रवाल हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राज्य महिला आयोग की सदस्य के पति और पुत्र समेत सात रसूखदार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर सवा लाख रुपये का अर्थदंड भी अधिरोपित किया है। यह मामला वर्ष 2012 का है, जब शहनाई बैंक्वेट हॉल में आयोजित अग्रसेन जयंती समारोह के दौरान शराब के नशे में धुत आरोपियों ने एक युवती से बातचीत करने के विवाद में प्रबल की बर्बरतापूर्वक पिटाई कर हत्या कर दी और शव को गंगा नदी में फेंक दिया था। 27 दिनों तक रहस्य बने रहे इस मामले में मुजफ्फरनगर के रामराज गंगा खादर क्षेत्र से शव बरामद हुआ, जहां मृतक की जेब से मिले मात्र 0.48 इंच लंबे और 0.35 इंच चौड़े सिम कार्ड ने 'सिस्टर' नाम से सेव नंबर के जरिए उसकी पहचान कराई।

सुनवाई के दौरान अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट डॉ.शहजाद अली ने विवेचना की गुणवत्ता पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि केस को कमजोर करने के इरादे से पुलिस ने उचित तरीके से विवेचना नहीं की। इस पर कोर्ट ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक सिटी, क्षेत्राधिकारी और तीन विवेचकों के विरुद्ध विभागीय जांच व कानूनी कार्यवाही के आदेश दिए और पुलिस महानिदेशक को छह महीने के भीतर इससे अवगत कराने को कहा।दोषियों में भाजपा नेता के पति विनय अग्रवाल, पुत्र अपूर्व अग्रवाल, वरिष्ठ अधिवक्ता संजय गुप्ता, सीमेंट कारोबारी राहुल गुप्ता, चक्की व्यवसायी अनुज गुप्ता, नमकीन फैक्ट्री संचालक निखिल अग्रवाल तथा कपड़ा व्यापारी आशीष अग्रवाल शामिल हैं। फैसले के बाद रसूखदार दोषियों को जिला जेल के बैरक नंबर आठ में भेज दिया गया है, जहां 14 साल तक दबदबा दिखाने वाले चेहरे अब आम कैदियों की तरह कतार में खड़े नजर आए।
14 साल का लंबा इंतजार, करोड़ों के प्रलोभन को ठुकराने का साहस और अंततः न्याय की जीत- यह फैसला देश-दुनिया के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया है। इस दौरान सदमे से माता-पिता की मौत हो जाने के बावजूद इकलौती बहन प्राची ने विपरीत परिस्थितियों, पुलिस के असहयोगात्मक रवैये और वकीलों के पीछे हटने के बाद भी एक सामाजिक योद्धा की तरह हार नहीं मानी। करोड़ों रुपये और दबाव को दरकिनार कर उसने साबित कर दिया कि अगर इरादा मजबूत हो तो अकेला इंसान भी सत्ता और रसूख की दीवार को भेदकर इंसाफ हासिल कर सकता है।फिलहाल अब सातों दोषी जेल की सलाखों के पीछे एक बार फिर न्याय की गुहार लगाने की योजना बना रहे हैं।
फोटो -बहन प्राची अग्रवाल और मृतक प्रबल अग्रवाल


