cbamazon
उत्तर प्रदेश

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में प्रो. राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न

 

81,882 विद्यार्थियों को प्रदान की गईं उपाधियां, 236 मेधावियों को 242 पदक

 

बुलंद संदेश ब्यूरो

प्रयागराज / लखनऊ (लेखराम मौर्य)। 

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में गुरुवार को प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय, प्रयागराज का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ।

 

समारोह में कुल 81,882 उपाधियाँ प्रदान की गईं। इनमें 42,960 छात्राएँ तथा 38,922 छात्र सम्मिलित हैं। उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए 236 विद्यार्थियों को कुल 242 पदक प्रदान किए गए। पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में 158 छात्राएँ तथा 78 छात्र शामिल हैं। सभी उपाधियों को डिजीलॉकर पर उपलब्ध कराया गया।

 

समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि प्रयागराज की धरती ऐतिहासिक, पौराणिक नगरी है, यहां मां गंगा, मां यमुना, मां सरस्वती का पावन संगम है। प्रयागराज की महान धरती पर महाकुंभ मेले का आयोजन होता है। उन्होंने प्रो. राजेन्द्र सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके लिए राष्ट्र सर्वोपरि था, इसके लिए उन्होंने अपने जीवन के सारे सुखों का त्याग कर दिया था। ऐसे महानुभाव के विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी बधाई के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की इस उपलब्धि में उनके देवतुल्य माता-पिता, गुरुजनों का विशिष्ट योगदान है। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों का बोध कराते हुए राष्ट्र की प्रगति के लिए समर्पित होकर कार्य करने का आह्वान किया।

 

मंत्री उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शिक्षा का स्तर उठाने में राज्यपाल के प्रयासों की सराहना की। राज्यपाल द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों और मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि उत्तर प्रदेश देश के सर्वाधिक ग्रेडिंग वाले विश्वविद्यालयों में से एक बन चुका है। आज देश व विश्व की रैंकिंग में प्रदेश के विश्वविद्यालयों का नाम शामिल है।

 

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि प्रो. राजेन्द्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होकर प्रसन्नता और गौरव की अनुभूति हो रही है। उन्होंने उपाधि व पदक प्राप्त विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि जीवन में चुनौतियां आएंगी, लेकिन आप चुनौतियों को पार करते हुए सफलता की ओर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि आप इस विश्वविद्यालय से केवल ज्ञान अर्जित कर नहीं निकल रहे, बल्कि संस्कार, ज्ञान, अध्यात्म और कौशल से स्वयं को और अपने आस-पास के वातावरण को भी प्रकाशित करें। रज्जू भैया के आदर्श आपके जीवन प्रेरणा का स्थायी स्वरूप बने रहें। उन्होंने कहा कि प्रयागराज ज्ञान, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना, महर्षि भारद्वाज, गंगा-यमुना-सरस्वती की पावन भूमि है, जिसने देश को अनेक साहित्यकार, न्यायविद, वैज्ञानिक, शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी दिए हैं। 2047 में विकसित भारत के निर्माण में सबसे बड़ी भूमिका युवाओं की होगी।

 

 

 

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न

 

 

दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन में प्रवेश : उच्च शिक्षा मंत्री

 

 

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज का 21वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न हुआ।

 

समारोह को संबोधित करते हुए उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि प्रयागराज के बारे में सबसे सार्थक उक्ति है - 'प्रयागे प्रविष्टमात्रे पापम् नश्यति' अर्थात प्रयाग में प्रवेश करते ही सब पाप नष्ट हो जाते हैं। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना के बाद इतने विशाल कार्य के उपरांत यज्ञ और अनुष्ठान के लिए इसी पावन भूमि को चुना था, इसलिए यहाँ आने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। यह अध्यात्म की भूमि है, धार्मिक चेतना की भूमि है, न्याय, ज्ञान और आस्था की नगरी है, स्वतंत्रता की बलिवेदी पर मर-मिटने वाले बलिदानियों की धरा है। बड़े-बड़े साहित्यकारों ने साहित्य को नई दिशा दी, ऐसी साहित्यकारों की भूमि रही है। जिस शहर में गंगा, यमुना, सरस्वती प्रवाहित होती हैं, जहाँ संगम होता है, वह तीर्थ बड़ा है। इसीलिए प्रयाग के आगे राज लगता है और यह प्रयागराज कहलाता है।

 

मंत्री उपाध्याय ने कहा कि ऐसी पावन भूमि पर यह विश्वविद्यालय है जो राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी के नाम पर है। वे इसी प्रयाग की भूमि में जन्मे एक ऐसे नेता थे जिन्होंने देश को दिशा दी। तीन तरह के नेता होते हैं - एक राजनेता जो इलेक्शन टू इलेक्शन सोचता है, 5 साल के बारे में सोचता है, अगला चुनाव कैसे जीता जाए इसकी योजना बनाता है। दूसरे जो आने वाले दशकों के बारे में सोचते हैं और तीसरे होते हैं राष्ट्रनेता जो आने वाली पीढ़ियों के बारे में सोचते हैं, शताब्दियों की योजना बनाते हैं। ऐसे राष्ट्रनेता थे राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी, जो एक साधारण परिवार से निकलकर भारत रत्न तक पहुंचे। आप ऐसे विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं जिसके नाम से ही प्रेरणा मिलती है।

 

उन्होंने कहा कि आज जिन छात्रों ने उपाधियां प्राप्त की हैं, मैं उनको और उनके माता-पिता को बधाई देता हूं। बच्चों को यह ख्याल रखना होगा कि आपकी इस उपलब्धि के पीछे आपके माता-पिता का त्याग, परिश्रम और संघर्ष छिपा है। उन्होंने अपनी इच्छाओं का दमन कर, पेट काटकर आपको पढ़ाया होगा। गुरुजनों ने कंधे से कंधा मिलाकर दिशानिर्देश दिया। इसलिए हमारी संस्कृति कहती है - मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव। इनके ऋण से हम कभी उऋण नहीं हो सकते।

 

उन्होंने कहा कि यह दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि नए जीवन में प्रवेश है। यह मुक्त विश्वविद्यालय संदेश देता है कि शिक्षा ग्रहण करने की कोई उम्र नहीं है। शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार पाना नहीं है। शिक्षा वह है जो संस्कारित नागरिक बनाए, समाज के प्रति संवेदनशीलता दिखाए, सामाजिक सरोकारों से जोड़े और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव जगाए। वही शिक्षा विकसित भारत के निर्माण में योगदान दे सकती है और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का विकसित भारत का विजन तभी पूरा होगा।

 

उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि मेरे लिए बहुत प्रसन्नता की बात है कि आप सभी ने ऐसे विश्वविद्यालय से उपाधियां प्राप्त की हैं जो राज्य का एकमात्र मुक्त विश्वविद्यालय है, जहाँ नौकरी पेशा, विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत, घर से बाहर न जा पाने वाली महिलाएं, दिव्यांगजन और विषम परिस्थितियों के कारण नियमित शिक्षा न ले सकने वाले छात्र-छात्राएं डिग्री लेते हैं। आपने केवल उपाधि नहीं, पदक भी प्राप्त किए हैं।

 

उन्होंने कहा कि आप ऐसे समय पर डिग्री प्राप्त कर रहे हैं जब देश में अनेकों संभावनाएं हैं। आज टेक्नोलॉजी, ज्ञान-विज्ञान और अध्यात्म का संगम हमारे पास है। जब यशस्वी प्रधानमंत्री कहते हैं कि 2047 में देश पूर्ण विकसित होगा, तो वह आप जैसे युवाओं के दम पर कहते हैं। मुझे प्रसन्नता है कि आज गोल्ड मेडल प्राप्त करने वालों में ज्यादातर बेटियां हैं। डबल इंजन की सरकार लगातार विकास के साथ-साथ देश की सीमाओं को भी सुरक्षित रख रही है।