बुलन्द संदेश ब्यूरो
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माल को 2 वर्षों से एक अदत अधीक्षक की तलाश,
कार्यवाहक अधीक्षक के इशारे पर नियमित कर्मचारियों पर भारी हैं कई संविदा कर्मी
बुलंद संदेश ब्यूरो
लखनऊ। राजधानी के स्वास्थ्य विभाग में निदेशालय और शासन स्तर पर बैठे अधिकारियों पर एक अधीक्षक भारी पड़ रहा है जिसकी वजह से पूरे विभाग की छवि धूमिल हो रही है क्योंकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में जिस तरह से भ्रष्टाचार व्याप्त है जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि इस कार्यालय सहित मंडल और प्रदेश स्तर तक उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों पर किसी नियम और शासनादेश का कोई असर नहीं हो रहा है अगर ऐसा है तो शान द्वारा हर साल शासनादेश क्यों जारी किया जाता है जब उसका अनुपालन नहीं हो सकता है । राजधानी का स्वास्थ्य विभाग यदि एक अधीक्षक का नियमानुसार स्थानांतरण नहीं कर सकता है तो अन्य कर्मचारियों के स्थानांतरण और तैनाती के विषय में कुछ भी कहना बेमानी है । बक्शी का तालाब स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जब कोई अधिकारी या कर्मचारी एक ही पद पर नियम विरुद्ध कई वर्षों तक जमा रहता है तो वह कर्मचारियों अधिकारियों की तरह व्यवहार ना करके तानाशाही रवैया अपना लेता है और उसके लिए नियम कानून कोई मायने नहीं रह जाते हैं ऐसा ही प्रकरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीकेटी और माल में देखने को मिल रहा है जहां नियमों को तक पर रखकर व्हाट्सएप पर अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है।
शासन के निर्देशानुसार कर्मचारी कर्मचारियों अधिकारियों की अपने संस्थान में उपस्थिति दर्ज करने के लिए बायोमेट्रिक मशीनों का प्रयोग किया जाना चाहिए या फिर ड्यूटी कार्ड के जरिए स्कैनिंग की व्यवस्था का नियम है इन सब के अलावा रजिस्टर पर समय डालकर उपस्थिति दर्ज करना भी नियमों के अंतर्गत आता है जिसका कोई भी अधिकारी निरीक्षण कर सकता है परंतु यहां तो एक छत्र राज चल रहा है इसलिए नियम कानून कोई मायने नहीं रखते हैं तभी तो वर्षों से व्हाट्सएप पर ही अस्पतालों का संचालन किया जा रहा है कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार पिछले दो वर्ष से एक बार भी माल क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केदो का निरीक्षण अधीक्षक द्वारा नहीं किया गया है बावजूद इसके अधीक्षक कार्यालय में बैठकर तानाशाही तरीके से अस्पतालों को चल रहा है फिर भी राजधानी का कोई भी अधिकारी इस ओर देखने को तैयार नहीं है। आपको बताते चलें कि 2011 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माल से नौकरी शुरू करने वाले डॉक्टर जेपी सिंह 2026 तक माल से बक्शी का तालाब तक ही एक ही पद पर जमे हुए हैं जबकि अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केदो के अधीक्षक कई बार बदले जा चुके हैं तमाम शिकायतों के बाद भी कोई भी अधिकारी यहां तक स्वास्थ्य मंत्री भी उक्त अधीक्षक का अब तक शासनादेश के अनुसार स्थानांतरण नहीं करा सके हैं। इस तरह कैसे मान लिया जाए कि राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था पटरी पर चल रही है। हर क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार होने के बावजूद नियमित जांच और कार्रवाई नहीं होने से जनता में कई बार आक्रोश देखने को मिला है बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के स्थानीय अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा नोटिस नोटिस खेल कर मामलों को दबा दिया जाता है ऐसा कई बार देखने को मिला है।

इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माल अंतर्गत तैनात दो फार्मासिस्ट ऐसे हैं जो यहां अपने को किसी डॉक्टर से कम नहीं समझते हैं और कभी भी उन्हें कोई दवा बांटते हुए नहीं देखा है जबकि वह हमेशा मरीज को दवाएं लिखते ही देखे जाते है ऐसे कर्मचारियों द्वारा ही अन्य कर्मचारियों की अधीक्षक से तरह-तरह की झूठी शिकायतें की जाती रहती हैं जिससे अधीक्षक दूसरों के कहने से ही कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने के लिए तरह-तरह के कंडे अपनाता रहता है। इसके अलावा कई कर्मचारी ऐसे हैं जो यहां वर्षों से जमे हुए हैं उनके लिए भी कोई नियम नहीं है तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मॉल में दो स्टाफ नर्स संविदा की पिछले कई वर्ष से तैनात हैं जिनकी नियुक्ति यहां दोबारा की गई है जबकि वह पहले इसी अस्पताल से कई आरोपों के बाद अधिकारियों की मिली भगत से माल और इटौंजा के लिए स्थानांतरित कर दी गई थी लेकिन यहां अवैध वसूली से इतनी कमाई होती है कि दूसरी जगह स्थानांतरित नहीं किया जा रहा है इन पर सिर्फ अवैध धन लक्ष्मी की मेहरबानी है इस तरह के जितने कर्मचारी यहां तैनात हैं उन पर कब करवाई की जाती है या फिर सभी मलाई खाते रहेंगे।


