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उत्तर प्रदेश

RTI में ₹11,166 जमा, फिर भी नहीं मिली सूचना! अब IGRS में भी 'गलत आख्या' का आरोप!

 बुलन्द संदेश  ब्यूरो

रजपुरा( सम्भल) रजपुरा  ब्लॉक क्षेत्र के ग्राम पंचायत जैदासपुर में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई व्यवस्था पर विकास खंड रजपुरा की ग्राम पंचायत जयदासपुर का एक मामला गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आरोप है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्यों से संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराने के नाम पर शिकायतकर्ता से पहले 11,166 रुपये जमा करा लिए गए, लेकिन महीनों बाद भी एक भी दस्तावेज नहीं दिया गया। जब शिकायतकर्ता ने प्रथम अपील और बाद में आई जी आर एस पोर्टल का सहारा लिया तो वहां भी वास्तविक जांच के बजाय सूचना उपलब्ध कराने की आख्या लगाकर शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया।
जयदासपुर निवासी श्यामवीर पुत्र मलखान सिंह ने 11 मार्च 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आवेदन कर वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्यों, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय, हैंडपंप, वृक्षारोपण सहित विभिन्न योजनाओं से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं।आवेदन के जवाब में ग्राम पंचायत सचिव देवराज सिंह ने बताया कि मांगी गई सूचना 5583 पृष्ठों में उपलब्ध है और उसकी प्रतियां उपलब्ध कराने के लिए 11,166 रुपये जमा कराने होंगे। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने निर्धारित शुल्क जमा कर दिया, लेकिन इसके बावजूद आज तक उसे एक भी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया।
सूचना न मिलने पर शिकायतकर्ता ने प्रथम अपील दायर की। आरोप है कि अपील के निस्तारण में यह आख्या प्रस्तुत कर दी गई कि 29 मई 2026 को समस्त सूचना उपलब्ध करा दी गई है, जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि उसे आज तक न कोई दस्तावेज मिला, न स्पीड पोस्ट की रसीद, न डाक का कोई प्रमाण और न ही सूचना प्राप्त करने का कोई हस्ताक्षरित रिकॉर्ड।आरटीआई से राहत नहीं मिली तो शिकायतकर्ता ने आईजीआरएस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि वहां भी मामले की निष्पक्ष जांच करने के बजाय एडीओ पंचायत ने ग्राम सचिव के पक्ष में गलत एवं भ्रामक आख्या प्रस्तुत कर दी। आरोप है कि बिना सूचना उपलब्ध कराए ही शिकायत के निस्तारण की संस्तुति कर दी गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि वास्तव में सूचना उपलब्ध कराई गई होती तो विभाग के पास उसकी डाक रसीद, स्पीड पोस्ट नंबर अथवा प्राप्ति का कोई प्रमाण अवश्य होता, लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य आज तक प्रस्तुत नहीं किया गया।शिकायतकर्ता का आरोप है कि सरकारी शुल्क लेने के बावजूद सूचना न देना, फिर प्रथम अपील और आई जी आर एस दोनों में गलत आख्या लगाकर शिकायतों का निस्तारण कर देना पूरे मामले को संदेह के घेरे में खड़ा करता है। उनका कहना है कि इससे पंचायत में हुए विकास कार्यों से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक होने से रोकने का प्रयास भी प्रतीत होता है।श्यामवीर ने पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराकर गलत आख्या लगाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।