बुलंद संदेश ब्यूरो
बीमारी, आर्थिक तंगी और जिम्मेदारियों के बीच पूरी की कानून की पढ़ाई, अब जरूरतमंदों को न्याय दिलाने का लिया संकल्प
संवाददाता: जावेद अब्बासी
सरधना। कहते हैं कि मजबूत इरादों के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ जाती है। इस कहावत को सरधना की एडवोकेट शबाना मलिक ने अपने जीवन से सच साबित कर दिखाया है। आर्थिक तंगी, बीमारी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और समाज के तानों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत के दम पर वकालत के क्षेत्र में पहचान बनाई।
शबाना मलिक ने घर-परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों के साथ कानून की पढ़ाई पूरी की। कई कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बाद उन्होंने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (AIBE) उत्तीर्ण किया और अब तहसील सरधना में बतौर अधिवक्ता प्रैक्टिस कर रही हैं।
शबाना मलिक केवल वकालत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। वह लोगों के आपसी विवादों को बातचीत और समझौते के जरिए सुलझाने का प्रयास करती हैं और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहती हैं।
उनकी इस उपलब्धि पर सोशल मीडिया, रिश्तेदारों, मित्रों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार शुभकामनाएं दी जा रही हैं।
एडवोकेट शबाना मलिक का कहना है, "मैं चाहती हूं कि हर लड़की अपने सपनों को पूरा करने का साहस करे। यदि मैं तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती हूं, तो दूसरी बेटियां भी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर अपनी मंजिल हासिल कर सकती हैं। मेरा उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद लोगों को न्याय दिलाने में उनकी मदद करना है।"
आज शबाना मलिक का संघर्ष और सफलता उन महिलाओं और बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का हौसला रखती हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।


