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उत्तर प्रदेश

सीजेएम द्वारा की गई विवेचना को त्रुटिपूर्ण,दोषपूर्ण और पक्षपातपूर्ण माना 

सीजेएम द्वारा की गई विवेचना को त्रुटिपूर्ण,दोषपूर्ण और पक्षपातपूर्ण माना 

बुलन्द संदेश ब्यूरो

अमरोहा(डा.महताब अमरोहवी )गत वर्ष सामाजिक कार्यकर्ता पंं. मनु शर्मा एडवोकेट की शिकायत पर मौजूदा बीएसए डा.मोनिका, तत्कालीन बीएसए, बीईओ जोया, शिक्षिका वर्षा गुप्ता, विभागीय लिपिक पटल सहायक व दो विभागीय व्यक्तियों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी एवं गबन की संगीन धाराओं में दर्ज हुए मुकदमें में नगर पुलिस द्वारा लगाई गई अंतिम आख्या को सीजेएम डॉ लकी ने निरस्त कर पुलिस विवेचना को त्रुटिपूर्ण, दोषपूर्ण और पक्षपात पूर्ण मानकर विधिपूर्ण तरीके से साक्ष्यों का संकलन कर अग्रिम विवेचना के आदेश दिए हैं।आरटीआई एसोसिएशन ऑफ इंडिया के जिलाध्यक्ष व सामाजिक कार्यकर्ता पं० मनु शर्मा एडवोकेट ने पूर्व में शिक्षिका वर्षा गुप्ता की शिकायत मृत महिला के राशन कार्ड से गरीबों का सरकारी राशन हड़पने को लेकर भी की थी। जिसमें जमानत कराने के बाद शिक्षक दंपति के विरुद्ध उक्त मुकदमा न्यायालय में लंबित है । इसी काे लेकर शिक्षिका वर्षा गुप्ता व शिक्षक पति अर्पित खंडेलवाल उनसे रंजिश मानते हैं। शिक्षक दंपति सरकारी विभागों से पैसा हड़पने और अपने पद का दुरुपयोग करने की अभ्यस्त है। शिक्षिका वर्षा गुप्ता ने 4 जुलाई से 14 अगस्त 2016 तक बिना कार्य किए बेसिक शिक्षा परिषद को धोखा देकर बिना किसी चिकित्सीय उपचार, परामर्श संबंधित दस्तावेेजों के आधार पर 42 दिवस का वेतन हड़पने और सरकारी धन का गबन करने की मंशा से गर्भपात अवकाश प्राप्त किया गया था। जबकि वास्तव में उनका कोई गर्भपात ही नहीं हुआ था। इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी जोया ने 23 फरवरी 2022 के द्वारा इस तथ्य की जानकारी दी गई।इस संबंध में वर्तमान बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं डीएम को कई शिकायती पत्र दिए। इस फर्जी गर्भपात अवकाश संबंधी प्रकरण की गहनता से जांच एवं कार्रवाई कराने की मांग भी की गई।इस संबंध में की गई जांच में पाया गया कि नियम का उल्लंघन कर अध्यापिका के मात्र प्रार्थना पत्र और शपथ पत्र के आधार पर ही उसे 42 दिवस का गर्भपात अवकाश स्वीकृत किया गया है। इसी के चलते वर्षा गुप्ता द्वारा घर बैठे 42 दिन का बिना सेवा कार्य किए ही सरकारी वेतन हड़प कर गबन किया गया। इस मामले में डीएम के आदेश पर मुख्य विकास अधिकारी ने भी मौजूदा बीएसए को उनके कार्यालय में तैनात पटल सहायक को उक्त प्रकरण में लापरवाही बरतने और गर्भपात अवकाश संबंधी मूल पत्रावली नहीं दिए जाने का दोषी मानकर उसके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्यवाही के लिए भी निर्देशित किया गया। परंतु उपरोक्त समस्त कृत्य में बीएसए डा.मोनिका द्वारा विभागीय संरक्षण देने के कारण कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।यह अनुमान लगाया जा रह है कि शिक्षिका के गर्भपात अवकाश संबंधी मूल पत्रावली व रिकार्ड को गायब करने में उनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका संग्दिध रही है। जबकि तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी जोया और बीएसए ने अपने सरकारी पद का दुरुपयोग करते हुए अध्यापिका से हमसाज होकर चिकित्सीय परामर्श, उपचार संबंधी अभिलेखों एवं जरूरी साक्ष्यों के बिना ही 42 दिवस का गर्भपात अवकाश पूर्ण वेतन पर स्वीकृत किया गया।

जिस कारण 42 दिन के वेतन का सरकार को धोखा देकर गबन किया गया। इस फर्जी वाड़े को लेकर जनसुनवाई पोटर्ल व एसपी को भी शिकायती पत्र दिया लेकिन कार्रवाई नहीं हुई. विवश होकर वह न्यायालय की शरण में गए। इस मामले में मनु शर्मा ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें नगर पुलिस ने न्यायालय को अंतिम आख्या प्रेषित की गई।जिसके विरुद्ध वादी मनु शर्मा एडवोकेट की याचिका को स्वीकार कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ लकी ने पुलिस द्वारा प्रेषित की गई अंतिम आख्या को निरस्त करके विधि पूर्ण तरीके से साक्ष्य संकलित कर अग्रिम विवेचना करने के लिए नगर पुलिस को आदेश पारित किए हैं ।जिस को लेकर विभाग में हड़कंप मच गया है।