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उत्तर प्रदेश

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीकेटी/ माल के अधीक्षक की नियुक्ति सवालों के घेरे में

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बीकेटी/ माल के अधीक्षक की नियुक्ति सवालों के घेरे में

 

जिसकी नियुक्ति खुद नियम विरुद्ध हो वह दूसरों का उत्पीड़न करने के अलावा कुछ नहीं कर सकता

 

बुलंद संदेश ब्यूरो 

लखनऊ। राजधानी के स्वास्थ्य महकमें में भ्रष्टाचार इतना चरम पर है कि कोई भी अधिकारी नियम, कानून और शासनादेश का अनुपालन कराने में असमर्थ नजर आ रहा है क्योंकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बक्शी का तालाब और माल का अधीक्षक जिस तरह से कर्मचारियों का उत्पीड़न कर अवैध कमाई करने में लगा हुआ है उससे तो यही लगता है कि उसका हिस्सा यदि उच्च अधिकारियों तक नहीं पहुंच रहा है तो क्यों नहीं शासनादेश का अनुपालन करते हुए उसे मंडल से बाहर किया जा रहा है । कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का जो व्हाट्सएप ग्रुप बना हुआ है उस पर अधीक्षक द्वारा हमेशा तरह-तरह की धमकियां दी जाती रहती हैं यह धमकियां वेतन काटने अनुपस्थित लगते देर से अस्पताल पहुंचने के संबंध में दी जाती हैं यदि इन कर्मचारियों द्वारा एक निश्चित रकम किसी न किसी के माध्यम से अधीक्षक के पास नहीं पहुंचाई जाती है तो उनके आकस्मिक अवकाश को निरस्त करके उसे दिन का वेतन काट दिया जाता है और यदि वह कर्मचारी अधीक्षक की सेवा कर देता है तो उसका वेतन नहीं कटता है इसके अलावा जो कर्मचारी देर से आने जल्दी चले जाने अथवा हमेशा अनुपस्थित रहने वाले हैं उनके द्वारा इसके बदले में अधीक्षक की सेवा करने के बाद सारे गुनाह माफ हो जाते हैं और यदि आप सही काम कर रहे हैं और उनकी सेवा नहीं करेंगे तो आपको कहीं न कहीं किसी न किसी प्रकार से परेशान किया जाएगा। दूसरी ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सस्पन् में दो डॉक्टरों के नियुक्ति होने के बावजूद फार्मासिस्ट पंकज वर्मा अपना काम न करके डॉक्टर का काम करते हैं वह हमेशा दवा लिखने का प्रयास करते रहते हैं जिससे डॉक्टर से उनकी अनबन होती रहती है। पंकज वर्मा की जगह स्वीपर धीरेंद्र यहां हमेशा दवा वितरण का काम करता है जो कभी-कभी मरीज को गलत दवाई भी दे देता है। पंकज वर्मा दवा वितरण में शर्म महसूस करते हैं क्योंकि आम आदमी उन्हें डॉक्टर समझता है इसलिए वह अपने को डॉक्टर कहलाने में और डॉक्टर का काम करने में गर्व महसूस करते हैं। इसमें उन्हें अधीक्षक का संरक्षण प्राप्त है इसलिए इस पर उनके खिलाफ किसी भी शिकायत पर करवाई नहीं हो सकती है। इसी प्रकार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माल में एक फार्मासिस्ट अपने कमरे में बैठकर हमेशा मरीजों को बाहर की दवाई लिखते रहते हैं कई मरीज ने बताया कि वह हमेशा बाहर की दवाई ही लिखते हैं और किसी-किसी मरीज से यह भी कह देते हैं कि जन औषधि केंद्र की दवा फायदा नहीं करेगी इसलिए वहां से न खरीदना। इस फार्मासिस्ट पर भी अधीक्षक की पूरी मेहरबानी है। 

 

लगभग 8 वर्ष से एक ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर जमे अधीक्षक को ही आसपास के सामुदायिक स्वास्थ्य केदो का अतिरिक्त चार्ज देना कहां तक उचित है एक जिले में ही तैनात एक डॉक्टर का कहना है कि नियमित बीकेटी के अधीक्षक को अधीक्षक का चार्ज नहीं दिया जाना चाहिए था क्योंकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माल से निलंबित होने के बाद इनको मोहनलालगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संबद्ध किया गया था और वहां से बहाल होने के बाद इनको बख्शी तालाब में पहले 2 साल तक चिकित्सा के रूप में तैनाती की गई उसके बाद अधिकारियों ने इसी केंद्र पर इनको अधीक्षक बना दिया जो 2020 से अब तक एक ही पद पर बने हुए हैं और माल का अतिरिक्त चार्ज भी करीब दो साल से संभाले हुए हैं। अनेक शिकायतों के बावजूद न इनसे माल का अतिरिक्त चार्ज लिया जा रहा है और ना ही माल में किसी अधीक्षक की नियुक्ति की जा रही है इस तरह अस्पतालों को अवैध कमाई का जरिया बनाने वाले एक तथाकथित अधीक्षक पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय कितना मेहरबान है यह जग जाहिर हो चुका है बावजूद इसके शासन में बैठे उच्च अधिकारी भी इसका संज्ञान नहीं ले रहे हैं। अब देखना है कि विभाग में नियम कानून शर्म हया धोकर पी चुके अधिकारी कब नींद से जागते हैं।