बुलन्द संदेश/मोनू कुमार
सम्भल। श्री कल्कि धाम में आयोजित मासिक सत्संग में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकालीन यज्ञ से हुई,जिसमें आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियाँ अर्पित कर समस्त मानवता के कल्याण की कामना की।
सत्संग को संबोधित करते हुए आचार्य जी ने कहा कि आध्यात्मिक यात्रा का पहला कदम है—“जहाँ हो,वहीं के होकर रहो।”उन्होंने बताया कि जब व्यक्ति वर्तमान में रहकर अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करता है,तभी उसके भीतर आत्मबोध की प्रक्रिया प्रारंभ होती है। भगवान बुद्ध का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बुद्ध का संदेश प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर प्राप्ति के लिए प्रेरित करता है,न कि स्वयं को सामान्य बताने के लिए।आचार्य प्रमोद कृष्णम् जी ने मंत्रों की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मंत्र केवल शब्द नहीं,बल्कि विश्वास की शक्ति से ही प्रभावी बनते हैं। जब श्रद्धा जुड़ती है,तब साधारण मंत्र भी महामंत्र बन जाता है। उन्होंने कहा कि बिना श्रद्धा के भगवान केवल पत्थर हैं,लेकिन विश्वास जुड़ते ही वही मूर्ति परमात्मा का साक्षात अनुभव कराती है।उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे अत्यंत सौभाग्यशाली हैं,जिन्हें उस पवित्र भूमि पर जन्म मिला है जहाँ भविष्य में भगवान श्री कल्कि अवतार लेंगे। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने सनातन संस्कृति के संरक्षण और सेवा का संकल्प लिया।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


