बुलन्द संदेश ब्यूरो
आध्यात्मिक एवं संस्कारपरक आयोजन समाज में नैतिक चेतना, पारिवारिक एकता एवं सांस्कृतिक मूल्यों को करते सुदृढ़ : प्रदीप बिश्नोई
कांठ,मुरादाबाद (सुदेश बिश्नोई) lस्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित सात दिवसीय श्री जाम्भाणी महायज्ञ का रविवार को श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक गरिमा पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। समापन दिवस पर प्रातःकाल जाम्भाणी पद्धति के अनुरूप हवन, सबदवाणी, पाहल, आरती एवं पूर्णाहुति का आयोजन हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने यज्ञाग्नि में आहुतियाँ समर्पित कर धर्मसंवर्धन, विश्वशान्ति, जीवदया, पर्यावरण संरक्षण तथा समस्त प्राणिमात्र के मंगल की कामना की।
हवनोपरान्त यज्ञाचार्य पूज्य स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज ने भगवान् जाम्भोजी जी के लोकमंगलकारी सिद्धान्तों का स्मरण कराते हुए धर्म, सदाचार, संयम, जीवदया एवं प्रभुभक्ति को मानव जीवन की वास्तविक साधना बताया। उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल वैदिक अनुष्ठान नहीं, अपितु आत्मशुद्धि, सामाजिक समरसता, नैतिक जागरण एवं लोककल्याण का दिव्य माध्यम है।इस अवसर पर अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप बिश्नोई एडवोकेट (मुरादाबाद) ने अपने उद्बोधन में पूज्य स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज द्वारा सम्पन्न कराए जा रहे धर्मप्रचार एवं यज्ञीय अभियानों की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे पूर्व भी उनके सान्निध्य में मोहम्मदपुर देवमल में छह माह तक निरन्तर यज्ञ एवं धर्मप्रचार का अनुपम कार्य सम्पन्न हो चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे आध्यात्मिक एवं संस्कारपरक आयोजन समाज में नैतिक चेतना, पारिवारिक एकता एवं सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं, इसलिए इनका आयोजन समय-समय पर निरन्तर होता रहना चाहिए।
समापन समारोह में विशिष्ट अतिथियों के रूप में राजवीर सिंह बिश्नोई (रैनी), श्रीओम (खलीलपुर), राजपाल सिंह (मुरादाबाद), सुखवीर सिंह (मुरादाबाद), डॉ. राकेश बिश्नोई (अगवानपुर), ओमकार सिंह (हरिद्वार), सेवानिवृत्त मास्टर आसाराम (मुरादाबाद) तथा सेवानिवृत्त उपनिरीक्षक रामावतार सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
मातृशक्ति में डॉ. छाया रानी (प्रोफेसर, दयानन्द आर्य कन्या डिग्री कॉलेज, मुरादाबाद एवं कार्यकारिणी सदस्य, जाम्भाणी साहित्य अकादमी, बीकानेर), संतोष देवी, विमला देवी, उषा देवी, रेखा देवी, अर्चना देवी तथा अंकिता देवी सहित अनेक श्रद्धालु महिलाओं ने श्रद्धा एवं समर्पण के साथ सहभागिता कर आयोजन की शोभा में अभिवृद्धि की। इस अवसर पर डॉ. छाया रानी ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि हम भगवान् जाम्भोजी द्वारा प्रतिपादित उनतीस नियमों एवं जीवन-मूल्यों को अपने आचरण में चरितार्थ कर लें, तो हमारा जीवन स्वतः ही धन्य, अनुशासित एवं कल्याणमय बन जाता है। उन्होंने विशेष रूप से मातृशक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि बालकों के व्यक्तित्व-निर्माण एवं संस्कार-संवर्धन की सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण भूमिका माता एवं बहनों की होती है, क्योंकि बालक अपने जीवन के प्रथम एवं मूलभूत संस्कार परिवार, विशेषतः मातृस्नेह एवं मातृमार्गदर्शन से ही ग्रहण करता है।

महायज्ञ के यजमान पूज्य स्वामी योगानन्द जी महाराज रहे। समापन अवसर पर पूज्य स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज ने सम्पूर्ण आयोजन की सफलता का श्रेय स्वामी योगानन्द जी महाराज को समर्पित करते हुए कहा कि उनके प्रेरणास्पद संकल्प, अथक परिश्रम एवं धर्मनिष्ठ भाव से ही इस श्री जाम्भाणी महायज्ञ का शुभारम्भ सम्भव हुआ। उनके समर्पण, सेवा, संगठन-कौशल एवं आध्यात्मिक प्रतिबद्धता ने सम्पूर्ण आयोजन को सफल, सुव्यवस्थित एवं अविस्मरणीय बनाने में आधारभूत भूमिका का निर्वहन किया।
पूर्णाहुति के उपरान्त प्रसाद-रूप विशाल भण्डारे का आयोजन सम्पन्न हुआ, जिसमें मुख्त्यारपुर नवादा सहित आसपास के ग्रामों एवं दूर-दराज़ से पधारे विश्नोई समाज तथा अन्य श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। सात दिवसीय इस महायज्ञ ने सम्पूर्ण क्षेत्र में धर्म, भक्ति, जीवदया, पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक समरसता का प्रेरणादायी संदेश प्रसारित किया।
समापन अवसर पर आयोजन समिति ने यज्ञाचार्य पूज्य स्वामी रामेश्वरानन्द जी महाराज, यजमान पूज्य स्वामी योगानन्द जी महाराज, राजूराम महाराज सहित समस्त संत-महात्माओं, विशिष्ट अतिथिगण, मातृशक्ति, युवा साथियों, ग्रामवासियों एवं प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले सभी श्रद्धालुओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।


