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उत्तर प्रदेश

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए मजाक बनकर रह गई मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला योजना

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के लिए मजाक बनकर रह गई मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेला योजना

 

अधीक्षक के नियंत्रण से बाहर हैं डॉक्टर और फार्मासिस्ट फिर भी सालों से व्हाट्सएप पर चल रहे माल के सरकारी अस्पताल

बुलंद संदेश ब्यूरो

लखनऊ (लेखराम मौर्य) । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाली योजना मुख्यमंत्री आरोग्य स्वास्थ्य मेलो को कर्मचारी एवं अधिकारियों ने मजाक बना कर रख दिया है क्योंकि शासन के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद कई अस्पताल ऐसे हैं जहां डॉक्टर और कर्मचारी प्रत्येक रविवार को लगने वाले स्वास्थ्य मेलों में भी समय पर न पहुंचते हैं और न ही समय पर जाते हैं इसका ताजा उदाहरण विकास खंड माल के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हसनापुर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ससपन है जहां रविवार को दोनों स्वास्थ्य केंद्र 4:00 बजे से पहले बंद हो गए और अस्पतालों में ताला लग गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हसनापुर समय से 2 घंटा पहले 2:00 बजे ही बंद हो गया और सभी कर्मचारी अधिकारी नदारत हो गए उसके बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ससपन मैं भी समय से पहले ही ताला लटकता मिला। यहां आज डॉक्टर आमिर ,फार्मासिस्ट पंकज कुमार वर्मा, एल टी दीपक कुमार एएनएम नुसरत साहित्य सभी कर्मचारी समय से पहले ही अपने-अपने घरों को चले गए थे क्योंकि यहां 3:30 बजे ताला लटक रहा था यहां कोई स्थाई डॉक्टर नहीं है केवल रविवार को स्वास्थ्य मेले वाले दिन डॉक्टर की ड्यूटी लगा दी जाती है। इसी प्रकार हसनापुर में चिकित्सा अधिकारी अभिलाषा स्थाई रूप से तैनात हैं यहां फार्मासिस्ट मुकेश कुमार धीरेंद्र सिंह एलटी, 

और ए एन एम नीलम की ड्यूटी लगाई गई थी लेकिन किसी ने बिना किसी कानून के डर के अस्पताल में ताला लगाकर बिना किसी अधिकारी को सूचना दिए नदारत हो गए। यहां तैनात डॉक्टर पर ग्रामीणों ने बाहर से महंगी दवाएं लिखने का आरोप लगाया। शनिवार को एक मरीज का पर्चा देखने के बाद पता चला कि अस्पताल मे टाइफाइड और आंख के ड्रॉप तक नहीं है जो बाहर से अपनी जान ,पहचान वाले मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली दवाएं लिखी जाती हैं जो कमीशन की वजह से इतनी महंगी होती हैं कि सामान्य आदमी आसानी से खरीद नहीं सकता। शनिवार को अस्पताल के बाहर दवा खरीद रहे नित्यानंद ने बताया कि उनके 9 साल के बच्चे को टाइफाइड हो गया है और आंख में भी कुछ समस्या है इन दोनों बीमारियों के लिए डॉक्टर ने बाहर से दवाई लिख दी हैं जो काफी महंगी हैं इसी प्रकार गांव के अन्य कई लोगों ने बताया कि यहां किसी भी बीमारी की 700 से 1500 तक मूल्य की दवाएं बाहर से लिखी जाती हैं और अंदर से बहुत कम एक दो टैबलेट दे दी जाती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बाद भी आज तक किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

यहां सबसे खास बात यह है कि 1 साल से अधिक समय से अधीक्षक के पद पर अस्थाई तौर पर तैनात डॉक्टर जेपी सिंह के नियंत्रण में कुछ भी नहीं है क्योंकि वह तीन दिन यहां आते हैं और तीन दिन बख्शी तालाब में रहते हैं जब यहां तीन दिन नहीं आते हैं तो कर्मचारियों की उपस्थिति व्हाट्सएप के माध्यम से लगती है इसके अलावा हर साल जारी होने वाले शासना देशो के बावजूद यह अधीक्षक पिछले 15 वर्षों से इसी जिले में चिकित्सा अधिकारी और अधीक्षक के पद पर जमे हुए हैं कुछ अधिकारियों का कहना है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी इन पर इतना मेहरबान है कि जिले में सबसे खराब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद यहां किसी स्थाई अधीक्षक की नियुक्ति नहीं की जा रही है और इनको काफी समय से दो जगह का चार्ज दे रखा है जबकि किसी भी अधीक्षक के लिए मरीजों की संतुष्टि के लिए एक ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काफी है बावजूद इसके इन पर कौन-कौन से अधिकारी मेहरबान है यह कह पाना मुश्किल है क्योंकि इन्हें आज तक जिले से बाहर नहीं भेजा गया जबकि इस साल का शासनादेश भी एक स्थान पर 3 साल से अधिक जमीन अधिकारियों को हटाने के लिए जारी किया गया था फिर भी इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा अब देखना है कि फोन ना उठाने वाले मुख्य चिकित्सा अधिकारी इस प्रकरण में क्या कार्रवाई करते हैं या फिर अपनी मेहरबानी बनाए रखते हुए ऐसे ही स्वास्थ्य मेलों को मजाक बनाते रहेंगे।