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उत्तर प्रदेश

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टरों ने बचाई मिर्गी के मरीज की जान

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के डॉक्टरों ने बचाई मिर्गी के मरीज की जान

 

बुलन्द संदेश/ अरशद हसन खान,  

 

 

 

पीलीभीत - स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत के गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट आपातकालीन एवं क्रिटिकल केयर सेवाओं का परिचय देते हुए 19 वर्षीय मिर्गी (एपिलेप्सी) से पीड़ित युवक को नया जीवन प्रदान किया। गंभीर अवस्था में अस्पताल लाए गए इस मरीज का अत्याधुनिक उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सकों की त्वरित कार्यवाही तथा समर्पित नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी के परिणामस्वरूप वह पूर्णतः स्वस्थ होकर अपने घर लौट सका।

जानकारी के अनुसार युवक लंबे समय से मिर्गी रोग से पीड़ित था, किंतु वह नियमित रूप से चिकित्सकीय परामर्शानुसार एंटी-एपिलेप्टिक दवाओं का सेवन नहीं कर रहा था। इसी दौरान उसे अचानक दौरा पड़ा और वह पास की एक गंदी नाली में गिर गया। दूषित पानी फेफड़ों में चले जाने से उसे सेकेंडरी ड्राउनिंग (Secondary Drowning), गंभीर श्वसन संकट (Respiratory Distress), ऑक्सीजन की कमी (Hypoxia) तथा एस्पिरेशन निमोनिया जैसी जानलेवा जटिलताएँ उत्पन्न हो गईं।

 

परिजनों द्वारा तत्काल मरीज को महाविद्यालय के आपातकालीन विभाग में लाया गया, जहाँ उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बिना विलंब आईसीयू में भर्ती किया गया। आईसीयू प्रभारी डॉ.अरविंद एम के नेतृत्व में विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ ने मरीज को संक्रमण नियंत्रण, एस्पिरेशन निमोनिया का उपचार, ऑक्सीजन स्तर सामान्य करने तथा न्यूरोलॉजिकल स्थिति को स्थिर रखने के लिए गहन चिकित्सा प्रदान की। निरंतर निगरानी एवं समुचित उपचार के फलस्वरूप मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और पूर्णतः स्वस्थ होने पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अमित कुमार ने जनसामान्य से अपील करते हुए कहा कि आर्थिक कारणों से कोई भी मरीज अपना उपचार या दवाएँ बीच में न छोड़े। उन्होंने बताया कि स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत में मिर्गी की दवाओं सहित सभी आवश्यक जीवनरक्षक औषधियाँ पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अतिरिक्त आधुनिक आपातकालीन सेवाएँ, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता तथा अत्याधुनिक आईसीयू की सुविधाएँ भी पूरी तरह सरकारी व्यय पर उपलब्ध हैं। इसलिए मरीजों एवं उनके परिजनों को महंगे निजी अस्पतालों में उपचार या दवाओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ उठाने की आवश्यकता नहीं है।