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उत्तर प्रदेश

*शहर वासियों का उत्पीड़न अवधेश शर्मा अध्यक्ष गाजियाबाद उद्योग व्यापार मंडल*

*शहर वासियों का उत्पीड़न अवधेश शर्मा अध्यक्ष गाजियाबाद उद्योग व्यापार मंडल*

बुलन्द संदेश /ब्यूरो

गाज़ियाबाद (आशा चौधरी)

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश , सरकार।

 इस पत्र के माध्यम से शहरवासियों की पीड़ा और हमारे स्थानीय सांसद, सभी सम्मानित विधायक गण, मेयर महोदया और नगर निगम के सभी पार्षदगणों की मासूमियत समझा जाए या जानबूझ कर सरकार की छवि को खराब करने का प्रयास कहा जाए, जो कि गाजियाबाद नगर निगम के माध्यम से पिछले कई दशकों से निरंतर हर दो वर्ष में 10% की दर से की जा रही वृद्धि के बावजूद गाजियाबाद की जनता पर 300 से 400% की दर से बेहताशा कर वृद्धि के माध्यम से जनता को गंभीर आर्थिक क्षति पहुंचा कर जनता में सरकार की जनविरोधी छवि बनाने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है। माननीय मुख्यमंत्री जी आपके माध्यम से हम अपने शहर के सभी जनप्रतिनिधियों से कुछ साधारण प्रश्न हैं, उनके जवाब जनता चाहती है।

1) गृहकरवृद्धि की वसूली की नाजायज कोशिश का सेक्टर रेट के आधार पर कर वसूली करने का आधार क्या है? क्या उत्तर प्रदेश में अधिकारियों को सेक्टर रेट के आधार पर वेतन और अन्य वेतन भत्ते दिए जाने की नीति है? क्या यूपी में नगर निगम के उपयोग में आने वाले डीजल, पेट्रोल, लोहा, सीमेंट, तारकोल, रोडी, बदरपुर आदि की कीमत और उन पर जी एस टी सेक्टर रेट के आधार पर लगाई जाती है? यदि नहीं तो सेक्टर रेट के आधार पर गृह कर का निर्धारण क्यों आवश्यक है? जब प्रत्येक दो वर्ष में 10% की दर से गृहकर वृद्धि पिछले लगभग डेढ़ दशक से निरंतर की जा रही है, तो अचानक इतनी गृहकर बढ़ोतरी क्यों?

2) जब गृहकर की दर बढ़ाने से पहले नगर निगम ने वार्षिक लाभ 500 करोड़ रूपये दिखा रखा है और जब नगर निगम के पास बजट की किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है, तो बेतहाशा गृहकर बढ़ोतरी के माध्यम से शहर वासियों का आर्थिक शोषण क्यों किया जा रहा है?

3) नगर निगम के अधिकारी 50% सम्पत्ति पर गृहकर नहीं लगा पाए। नगर निगम के अधिकारी अपनी नाकाबिल अफसरशाही और सिर्फ अपने निजी विकास में मस्त रहते हुए जो लोग पहले से ईमानदारी से गृहकर समय से जमा करा रहे थे, सिर्फ उन पर ही आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है?

3) हमारे जनप्रतिनिधि और नगर निगम के अधिकारी शहर के विकास के लिए गृहकर बढ़ोतरी में बेहतशा वृद्धि कर ज्यादा धन संग्रह की आवश्यकता बता रहे हैं, तो जनता का निवेदन मुख्यमंत्री से है कि क्या यूपी सरकार गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को भंग कर गाजियाबाद के विकास की जिम्मेदारी नगर निगम को सौंपने जा रही है? क्योंकि शहर वासियों को तो इतना ही पता है कि शहर के विकास की जिम्मेदारी जी डी ए की होती है और शहर के पार्कों, सड़कों, स्ट्रीट लाइटों, शहर की सफाई और नाले और नालियों की सफाई की जिम्मेदारी नगर निगम की होती है, ना कि विकास की।

4) , मुख्य बिंदु हमारे शहर के जनप्रतिनिधियों की जनता का सही प्रतिनिधित्व करने में विफल रहना है जिसका सीधा सा उदाहरण पिछले वर्ष 30 जून 2025 को सभी जनप्रतिनिधियों के नगर निगम की बोर्ड बैठक की मीटिंग बुलाकर सर्व सम्मति से गृहकर वृद्धि को निरस्त कर गृहकर को पुरानी दरों पर लागू करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया था, जिसको हमारे जनप्रतिनिधि लागू करवाने में विफल रहे हैं।हमारे जन प्रतिनिधियों की लाचारी है कि नगर आयुक्त महोदय ने सांसद , सभी विधायकगणों, माननीय मेयर और पार्षदों की उपस्थिति वाली बोर्ड बैठक को ही झूठे तर्क देकर निरस्त कर दिया कि 30 जून से पहले की बोर्ड बैठक जो 7 मार्च 2025 को हुई थी, दोनों बैठकों में छह महीने का अंतराल होना चाहिए था, जिस कारण 30 जून वाली बैठक को अवैध घोषित कर दिया गया। जबकि ना तो मेयर साहिबा ने और ना ही किसी पार्षद ने और ना ही सांसद और ना ही किसी विधायक ने 7 मार्च 2025 की अवैध बैठक जिसमें सभी पार्षदों और मेयर साहिबा की सहमति से जिसमें तीन से चार गुना कर वृद्धि का प्रस्ताव पास किया था वो बोर्ड बैठक ही अवैध थी। क्योंकि उससे पूर्व जो बोर्ड बैठक हुई थी, वो 9 अक्टूबर 2024 को हुई थी। दोनों बैठकों में भी 6 महीने का अंतराल ना होकर 5 महीने 26 दिन का अंतराल था। उसके बाद भी हमारे जनप्रतिनिधियों द्वारा अवैध बैठक को निरस्त घोषित कराने की कोशिश की गई, उल्टा शहरवासियों को आर्थिक शोषण के जाल में फंसाने की योजनाओं में व्यस्त हो गए।

अतः मुख्यमंत्री जिस किसी भी माध्यम से शहरवासियों का निवेदन है कि इस मामले में हस्तक्षेप कर गाजियाबाद में गृहकर बढ़ोतरी को निरस्त करके पुरानी दरों पर लागू करने का आदेश जारी करें।

 अवधेश शर्मा

 हाउसटैक्स विरोधी संघर्ष समिति गाजियाबाद