सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) एवं बांझपन प्रबंधन पर विशेषज्ञों ने साझा किया नवीनतम ज्ञान, स्नातकोत्तर विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर लिया भाग
बुलन्द संदेश ब्यूरो
हापुड़ (वसीम खाॅन ) सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल (सिम्स), हापुड़ के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग द्वारा "जीनोविया–आईएसएआर राष्ट्रीय पीजी शिक्षण पहल" के अंतर्गत सहायक प्रजनन तकनीक (एआरटी) एवं बांझपन प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम का उद्देश्य स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के ज्ञान, नैदानिक कौशल एवं आधुनिक प्रजनन चिकित्सा की समझ को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों एवं विशेषज्ञों के बीच संवाद, अनुभव साझा करने तथा साक्ष्य-आधारित चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया। सीएमई में बांझपन प्रबंधन के संपूर्ण विषय को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में प्रजनन शरीर क्रिया विज्ञान, ओवेरियन रिजर्व असेसमेंट, कंट्रोल्ड ओवेरियन स्टिम्युलेशन प्रोटोकॉल, आईवीएफ लैब वर्कफ़्लो, भ्रूण विकास, पुरुष बांझपन, इंफर्टिलिटी अल्ट्रासाउंड, एआरटी की जटिलताएं, नैतिक एवं कानूनी पहलुओं सहित प्रजनन चिकित्सा के भविष्य पर विस्तृत व्याख्यान दिए गए। कार्यक्रम में देश की प्रतिष्ठित प्रजनन चिकित्सा विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। डॉक्टर ईशा, आईवीएफ विशेषज्ञ, लोकप्रिय हॉस्पिटल, मेरठ ने सत्र 0, 2, 4, 5 एवं 6 का संचालन करते हुए बांझपन के आधुनिक उपचार, आईवीएफ प्रक्रियाओं एवं क्लीनिकल अनुभवों पर विस्तृत जानकारी दी। डॉक्टर नीति विजय, वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं आईवीएफ विशेषज्ञ, द क्लीनिक्स, ग्रीन पार्क, नई दिल्ली ने सत्र 1 एवं 3 में आधुनिक आईवीएफ तकनीकों, साक्ष्य-आधारित बांझपन प्रबंधन तथा प्रजनन चिकित्सा के नवीनतम आयामों पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में इंटरैक्टिव व्याख्यान, क्लीनिकल केस चर्चा, शैक्षणिक वीडियो, केस-आधारित शिक्षण तथा प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किए गए, जिससे प्रतिभागियों को जटिल चिकित्सीय विषयों को व्यवहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।

विशेषज्ञों के साथ संवाद ने विद्यार्थियों के ज्ञान एवं आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि की इस राष्ट्रीय सीएमई में विभाग के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों एवं फैकल्टी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम ने युवा चिकित्सकों को देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों से सीखने, जटिल मामलों पर चर्चा करने तथा सहायक प्रजनन तकनीक के नवीनतम विकास से परिचित होने का अवसर प्रदान किया इस अवसर पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर पारिधि गर्ग ने सभी विशेषज्ञों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम भविष्य के स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों को आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, वैज्ञानिक सोच एवं गुणवत्तापूर्ण रोगी देखभाल के लिए तैयार करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं संस्थान की प्राचार्या डॉक्टर बरखा गुप्ता, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट मेजर जनरल डॉक्टर चरनजीत सिंह आहलूवालिया, सीनियर एडवाइजर ब्रिगेडियर डॉक्टर आर. के. सहगल, निदेशक रघुवर दत्त तथा महाप्रबंधक एन. वर्धराजन ने कार्यक्रम की सफलता पर प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग को बधाई देते हुए कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रम संस्थान की उत्कृष्ट चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं संस्थान के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉक्टर जे. रामचंद्रन तथा वाइस चेयरपर्सन रम्या रामचंद्रन ने विभाग, आयोजन समिति, आमंत्रित विशेषज्ञों एवं सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि चिकित्सा शिक्षा में निरंतर नवाचार, अनुसंधान एवं कौशल विकास के माध्यम से ही भविष्य के कुशल चिकित्सकों का निर्माण संभव है। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए विभाग की सराहना की और भविष्य में भी ऐसे राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने की शुभकामनाएं दीं।

जीनोविया–आईएसएआर राष्ट्रीय पीजी शिक्षण पहल" जैसे राष्ट्रीय शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से सारस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता स्थापित करते हुए भावी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों को आधुनिक ज्ञान, नैदानिक दक्षता एवं मानवीय मूल्यों से सशक्त बनाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।


