बुलंद संदेश ब्यूरो
लखनऊ (लेखराम मौर्य)।
उत्तर प्रदेश सूचना आयोग, लखनऊ द्वारा अपील संख्या S03/A/0704/2024, सीमा सिंह बनाम जन सूचना अधिकारी, कार्यालय अपर पुलिस अधीक्षक, जनपद कानपुर देहात में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए अपीलार्थिनी को रू0 20,000/- (बीस हजार रुपये) की क्षतिपूर्ति प्रदान किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रकरण में अपीलार्थिनी द्वारा सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत दिनांक 04 अक्टूबर, 2023 को आवेदन प्रस्तुत कर चार बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी गई थीं। उक्त सूचनाएं थाना रू़रा, जनपद कानपुर देहात से संबंधित एक आपराधिक प्रकरण में लेखपाल अशोक कुमार की गिरफ्तारी, गिरफ्तारी से संबंधित अभिलेखों तथा वाहन संख्या न्च्78 थ्ड 7181 के संबंध में मांगी गई थीं।
जन सूचना अधिकारी द्वारा दिनांक 01 नवंबर, 2023 को यह अवगत कराया गया कि मांगी गई सूचना सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(j) एवं धारा 11 के अंतर्गत देय नहीं है। इसके उपरांत अपीलार्थिनी द्वारा प्रथम अपील तथा तत्पश्चात द्वितीय अपील आयोग के समक्ष प्रस्तुत की गई।
आयोग के समक्ष सुनवाई के दौरान उपलब्ध अभिलेखों के परीक्षण से यह तथ्य सामने आया कि मांगी गई सूचनाओं के संबंध में संबंधित अभिलेख विभाग के पास उपलब्ध थे तथा प्रकरण की जांच एवं विवेचना से संबंधित अभिलेखों में गिरफ्तारी मेमो, एफआईआर, केस डायरी, चिकित्सकीय परीक्षण संबंधी अभिलेख तथा अन्य संबंधित दस्तावेज उपलब्ध थे। आयोग ने यह भी पाया कि अपीलार्थिनी द्वारा मांगी गई सूचना के संबंध में विभागीय स्तर पर की गई कार्रवाई एवं उपलब्ध अभिलेखों के अनुरूप सूचना प्रदान की जा सकती थी।
आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि लोक सेवक द्वारा अपने शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान की गई कार्रवाई से संबंधित अभिलेखों के संबंध में सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का परीक्षण करते समय विधिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना आवश्यक है। आयोग ने यह उल्लेख किया कि सूचना उपलब्ध कराने के संबंध में अपनाई गई प्रक्रिया के कारण अपीलार्थिनी को वांछित सूचना प्राप्त होने में लगभग दो वर्ष का विलंब हुआ।
आयोग ने यह भी संज्ञान लिया कि अपीलार्थिनी को प्रारंभिक स्तर पर ऐसी सूचना दी गई, जिससे उसे मांगी गई सूचना अधिनियम के अंतर्गत उपलब्ध नहीं होने का आभास हुआ, जबकि बाद की कार्यवाही में विषय-वस्तु के अनुरूप सूचना उपलब्ध कराई गई। आयोग ने इस स्थिति को अपीलार्थिनी के लिए हानिकारक मानते हुए उचित क्षतिपूर्ति प्रदान किया जाना आवश्यक माना।
आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान प्रकरण न्यायालय के समक्ष विचाराधीन होने के कारण उसके गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किया जाना उचित नहीं है। आयोग ने सूचना के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पारदर्शिता एवं विधि सम्मत सूचना उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
रू0 20,000 की क्षतिपूर्ति का आदेश
उपरोक्त तथ्यों एवं परिस्थितियों के दृष्टिगत राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता ने आदेशित किया कि विपक्षी जन सूचना अधिकारी/अपर पुलिस अधीक्षक, जनपद कानपुर देहात, जो दिनांक 01 नवंबर, 2023 को पदस्थ थे, द्वारा अपीलार्थिनी को रू0 20,000/- (बीस हजार रुपये) की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में अदा की जाए।
आदेश की प्रति जिलाधिकारी, कानपुर देहात को अनुपालन हेतु तथा निर्णय की प्रति रजिस्ट्रार, उत्तर प्रदेश सूचना आयोग को आवश्यक कार्रवाई एवं क्षतिपूर्ति की धनराशि की वसूली हेतु प्रेषित किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आयोग ने प्रकरण को उपर्युक्त निर्देशों के साथ निस्तारित कर दिया है।


