हजरत इमाम हुसैन ने कभी भी ज़ुल्म के आगे सर नही झुकाया : मौलाना सैय्यद शहवार हुसैन
बुलन्द संदेश/मौहम्मद अब्बास
जहांगीराबाद कोतवाली क्षेत्र के गांव सांखनी में माहे मोहर्रम की अज़ादारी का सिलसिला जारी है । घरों में महिलाएं इमाम हुसैन और उनके साथ शहीद हुए लोगों पर गिरया ओ मातम कर रही हैं दरगाह शाह ए नजफ़ दरगाह बाबुल मुराद दरगाह बाब ए ज़हरा और दरगाह बैतुल मुराद हुसैनिया में भी मजलिस ओ मातम किया जा रहा है सोमवार को सांखनी में मोहर्रम की 6 तारीख को अंजुमन आले अतहर के ज़ेरे निगरानी दरगाहे बाबुल मुराद से शहजादा हज़रत अली अकबर इब्ने हजरत इमाम हुसैन का ताबूत बरामद हुआ जिसमें बड़ी तादात में सोगवारानों ने नोहेख्वानी और मातमदारी बरपा की जूलूस में नोहेख्वानी वसीम रियाज़, हसन अब्बास, सरदार अली,आज़ाद नाज़िम, व साहिल अब्बास, और समर अब्बास ने की।
ताबूत निकलने से पहले दरगाहे शाहे नजफ में मजलिस का एहतमाम किया गया मजलिस में सोजख्वानी तसव्वुर अब्बास और कल्बे हसन वा हमनवा ने करी और पेशख्वानी को फ़ज्र मिर्ज़ा फ़ज्र और मोहम्मद मेहदी ने अंजाम दिया।
मजलिस को मौलाना सैय्यद शहवार हुसैन ने खिताब फरमाया।
मौलाना ने हज़रत इमाम हुसैन की शहादत का ज़िक्र किया । उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन ने कभी भी ज़ुल्म के आगे सर नही झुकाया । इमाम हुसैन ने यज़ीद से कहा कि मुझ जैसा तेरे जैसे कि कभी बैअत नही कर सकता । में अपने नाना का दीन बचाने आया हूँ ।
मौलाना ने लोगों से प्यार मोहब्बत के साथ रहने की अपील की ।
जुलूस में अंजुमन आले अतहर के सदर आज़ाद अली, हाजी ज़रगाम अली, हाजी शेर अली, मास्टर बशारत अली, बाबू भाई, मास्टर सादिक अली, सिब्ते हसन, ज़रगाम अली, आबाद अली, हसन अब्बास, मुनाजिर बल्लू, शजर, शब्बर, मीसम,रज्जू भाई, रोजे अली ,मंज़र अब्बास, हसन बाबू,अली कामरान , वसीम अब्बास, चांद मोहम्मद, गाज़ी अब्बास, गय्युर अब्बास ,मौहम्मद असद, अली हाशिम,आदि मौजूद रहे।


