राम भरोसे चल रही गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था , आधे से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद है
बुलंद संदेश ब्यूरो
लखनऊ। राजधानी के विकासखंड माल अंतर्गत जिस तरह से स्वास्थ्य व्यवस्था चल रही है उसे यह कहना गलत नहीं होगा कि वह राम भरोसे चल रही है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे यहां के आधे से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद हो चुके हैं जहां किसी की तैनाती नहीं है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र माल अंतर्गत 36 उप स्वास्थ्य केंद्रो को का नाम बदलकर सरकार ने उन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नाम दे दिया और वहां नई इमारते बना दी गई और इन केदो पर सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई और तमाम परेशानियों को देखते हुए यहां के आधे से अधिक मंदिर बंद हो चुके हैं और जो करीब डेढ़ दर्जन केंद्र बच्चे हैं जहां सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों की नियुक्ति है उनमें से कई केंद्र अधिकारियों की मेहरबानी से लगातार बंद रहते हैं। सूत्रों ने बताया कि ऐसे अधिकारी महीने में एक या दो बार आकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर चले जाते हैं और केंद्र न खोलने के बदले में अधिकारियों को मोटी रकम देनी पड़ती है जिससे दोनों खुश रहते हैं। ऐसे ही कुछ केदो की शुक्रवार को बुलंद संदेश ने पड़ताल की तो पता चला कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर गहदो, सैदापुर, जमोलिया में तैनात अधिकारी कभी कभार आकर अपनी हाजिरी लगाकर चले जाते हैं ग्रामीणों का कहना है कि यहां कभी आज तक नियमित रूप से केंद्र नहीं खुलता है। और दवाई भी ग्रामीणों को नहीं वितरित की जाती हैं। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि केंद्र लगातार बंद रहते हैं तो इन केदो के लिए आवंटित होने वाली दवाएं कहां जाती हैं इसका जिम्मेदार कौन है?

इसी तरह यदि दवाएं केंद्र पर लाइ नहीं जाती हैं तो दवाएं वितरित कैसे हो रही हैं? सैदापुर में मोनिका जायसवाल और गहदो में चांदनी ने अपना नाम और पद तो केंद्र पर लिख रखा है परंतु उनके नियमित न आने और दवा का वितरण न होने से ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। सैदापुर में जो नंबर उन्होंने लिख रखा है वह नंबर मिलाने पर किसी सुधीर यादव और फिर देवेंद्र सिंह का नाम लिखकर आता है जबकि इनका नाम मोनिका जायसवाल है। जमोलिया के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी का कई महीने से अता पता नहीं है कई ग्रामीण तो उसका चेहरा तक नहीं जानते हैं क्योंकि वह कई महीने से लगातार गायब है। इसी तरह कुछ और केंद्र बताए जा रहे हैं जो कागजों पर संचालित किए जा रहे हैं और उनके अधिकारी घरों में मौज कर रहे हैं अब देखना होगा कि भ्रष्टाचार में नीचे से ऊपर तक मुंह लाल किए घूम रहे अधिकारी इस प्रकरण को किस तरह देखते हैं और कार्रवाई करते हैं।


