cbamazon
उत्तर प्रदेश

नीरज मित्तल के दिवाली मिलन समारोह से गरमाई मेरठ की सियासत

नीरज मित्तल के दिवाली मिलन समारोह से गरमाई मेरठ की सियासत

एक नवंबर को एसजीएम गार्डन में जुटेगी भीड़, भाजपा में टिकट की दावेदारी और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन को लेकर चर्चाएं तेज

बुलंद संदेश ब्यूरो:जावेद अब्बासी 

मेरठ। शहर की राजनीतिक गतिविधियों के बीच व्यापारी नेता नीरज मित्तल का प्रस्तावित दिवाली मिलन समारोह चर्चा का विषय बन गया है। एक नवंबर को लालकुर्ती स्थित एसजीएम गार्डन में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम को भले ही प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का आयोजन बताया जा रहा हो, लेकिन इसके साथ ही भाजपा की आगामी चुनावी राजनीति और टिकट की दावेदारी को लेकर भी कयास लगाए जाने लगे हैं।

सुबह 11 बजे से प्रस्तावित इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां जोरों पर बताई जा रही हैं। आयोजकों की ओर से लोगों को निमंत्रण भेजे जा रहे हैं। समारोह में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। करीब पांच हजार लोगों के भोजन और मिठाई के डिब्बे वितरित किए जाने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में है।

इससे पहले आयोजित पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल की मौजूदगी में नीरज मित्तल ने अपनी राजनीतिक मंशा जाहिर करते हुए कहा कि यदि पार्टी उन्हें टिकट देती है तो वह चुनाव जरूर लड़ेंगे। उनके इस बयान के बाद समारोह को केवल सामाजिक आयोजन के बजाय संभावित चुनावी तैयारी के नजरिये से भी देखा जा रहा है।

नीरज मित्तल पिछले कुछ समय से कंकरखेड़ा को धर्मनगरी के रूप में पहचान दिलाने के प्रयासों को लेकर भी सक्रिय रहे हैं। उनके आयोजनों और लगातार जनसंपर्क के चलते राजनीतिक हलकों में उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। समारोह के प्रचार में धार्मिक और सामाजिक संदेशों को भी प्रमुखता दी जा रही है। इस दौरान 'हर कोई भजेगा राम नाम, गूंजेगा हनुमंत नाम' का नारा भी दिया गया।

हालांकि, भाजपा के भीतर टिकट की दावेदारी को लेकर एक अलग बहस भी सामने आ रही है। पार्टी से जुड़े कुछ लोगों का मानना है कि चुनावी राजनीति में केवल बड़े आयोजन, आर्थिक संसाधन और प्रचार-प्रसार ही पर्याप्त नहीं होते। किसी भी दावेदार की असली ताकत उसका संगठनात्मक अनुभव, कार्यकर्ताओं के बीच पकड़ और जनता के बीच उसकी स्वीकार्यता होती है।

कुछ कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि लंबे समय से संगठन में काम कर रहे जमीनी नेताओं और नए राजनीतिक दावेदारों के बीच पार्टी किस आधार पर फैसला करेगी। उनका मानना है कि टिकट वितरण में पार्टी के प्रति निष्ठा, जनसेवा और क्षेत्र में किए गए काम को भी महत्व मिलना चाहिए।

व्यापारियों के बीच भी नीरज मित्तल की भूमिका को लेकर चर्चा है। सेंट्रल मार्केट, शास्त्री नगर सहित शहर के विभिन्न इलाकों में व्यापारियों की समस्याएं लंबे समय से उठती रही हैं। ऐसे में व्यापारी राजनीति से जुड़े नेताओं के सामने इन समस्याओं को प्रभावी ढंग से उठाने और समाधान कराने की चुनौती भी है।

फिलहाल एक नवंबर का दिवाली मिलन समारोह नीरज मित्तल के लिए अपनी सामाजिक और राजनीतिक सक्रियता दिखाने का बड़ा अवसर माना जा रहा है। लेकिन इस आयोजन में जुटने वाली भीड़ कितनी राजनीतिक ताकत में बदलती है और भाजपा संगठन में उनकी दावेदारी को कितना समर्थन मिलता है, यह आने वाला समय ही बताएगा।

सियासत में पहचान आयोजनों से बन सकती है, लेकिन राजनीतिक भविष्य का फैसला संगठन में पकड़, जनता के भरोसे और जमीनी काम से ही होता है।